खगोलविदों ने भूरे बौने साथी वाले ब्लू स्ट्रैगलर तारे की पहली पुष्ट खोज की
IIA और ARIES सहित भारतीय और इतालवी संस्थानों के खगोलविदों ने भूरे बौने साथी वाले ब्लू स्ट्रैगलर तारे की दुनिया की पहली पुष्ट खोज की है। दोनों पिंड मात्र 5.6 घंटे में परिक्रमा करते हैं, और साथी किसी ब्लू स्ट्रैगलर के आसपास पाया गया सबसे हल्का है। निष्कर्ष तारों के विकास के मॉडल को परिष्कृत करते हैं।
खगोलविदों की एक टीम ने एक अत्यंत सघन द्विआधारी (दो-पिंड) प्रणाली में भूरे बौने (ब्राउन ड्वार्फ) साथी वाले ब्लू स्ट्रैगलर तारे की दुनिया की पहली पुष्ट खोज की है। यह खोज भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), गुवाहाटी विश्वविद्यालय और इटली के INAF-कैटानिया खगोल भौतिकी वेधशाला के शोधकर्ताओं ने की। यह खोज तारों के विकास को समझने के तरीके को बदल सकती है।
ब्लू स्ट्रैगलर तारे लंबे समय से खगोलविदों के लिए पहेली रहे हैं। ये किसी तारा समूह में अपेक्षा से अधिक चमकीले और नीले दिखते हैं, जो असामान्य है क्योंकि किसी समूह के सभी तारे समान आयु के माने जाते हैं। भूरा बौना, जो इस मामले में साथी है, एक ऐसा पिंड है जो ग्रह बनने के लिए बहुत भारी पर सच्चे तारे की तरह जलने के लिए बहुत हल्का है।
इस प्रणाली में दोनों पिंड लगभग 5.6 घंटे (0.234 दिन) की अत्यंत कम अवधि में एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं। यह साथी किसी ब्लू स्ट्रैगलर के आसपास अब तक पाया गया सबसे हल्का है, जिसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 0.056 गुना है, जो इसे हाइड्रोजन जलने की सीमा से नीचे रखता है। अध्ययन के अनुसार यह तथाकथित "भूरे बौने रेगिस्तान" के भीतर पाई गई सबसे कम-अवधि वाली द्विआधारी प्रणाली है।
ये निष्कर्ष 'मंथली नोटिसेज़ ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी: लेटर्स' पत्रिका में प्रकाशित हुए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कहा कि यह खोज तारों के विकास, परस्पर क्रिया और चरम परिस्थितियों में अस्तित्व की समझ को बेहतर बनाती है, और तारकीय विकास के सैद्धांतिक मॉडलों को परिष्कृत करने में मदद करती है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- यह भूरे बौने साथी वाले ब्लू स्ट्रैगलर तारे की दुनिया की पहली पुष्ट खोज है।
- यह खोज IIA, ARIES, गुवाहाटी विश्वविद्यालय और INAF-कैटानिया वेधशाला (इटली) ने की।
- ब्लू स्ट्रैगलर अपने समूह के लिए अपेक्षा से अधिक चमकीला व नीला दिखता है; भूरा बौना ग्रह के लिए बहुत भारी पर तारे के लिए बहुत हल्का है।
- द्विआधारी प्रणाली की परिक्रमा अवधि लगभग 5.6 घंटे है; साथी का द्रव्यमान सूर्य का लगभग 0.056 गुना है।
- निष्कर्ष 'मंथली नोटिसेज़ ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी: लेटर्स' में प्रकाशित हुए।
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC, SSC और राज्य PCS (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) के लिए उपयोगी: अंतरिक्ष विज्ञान, IIA व ARIES जैसे भारतीय शोध संस्थान और तारकीय अवधारणाएँ परीक्षा-उपयोगी हैं।
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