कमज़ोर मानसून और El Nino की चिंताओं के बीच केंद्र ने 315 जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएँ सक्रिय कीं
मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 43% कम होने के साथ, केंद्र ने 315 जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएँ सक्रिय की हैं, जिनमें millets और दलहन, check dams और farm ponds तथा एक El Nino निगरानी प्रकोष्ठ को बढ़ावा दिया गया है, और ICAR District Agriculture Contingency Plans तैयार कर रहा है।
मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 43% कम चलने के साथ, केंद्र सरकार ने खाद्य उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए 315 संवेदनशील जिलों में कृषि आकस्मिक योजनाएँ (contingency plans) सक्रिय कर दी हैं। कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बारिश कमज़ोर रहने पर भी खेती की ज़मीन परती (खाली) न रहे।
किसानों को दलहन और मोटे अनाज (millets) जैसी वैकल्पिक, कम पानी वाली फसलों की ओर निर्देशित किया जा रहा है, जबकि check dams और farm ponds जैसे स्थानीय जल-संचयन कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। वास्तविक समय में मौसम पर नज़र रखने के लिए एक समर्पित El Nino निगरानी प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है। El Nino की स्थितियाँ भारत में कमज़ोर मानसून बारिश से जुड़ी होती हैं।
सरकार ने जिलों को जोखिम के आधार पर वर्गीकृत किया है: 111 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में 25% से कम सिंचित क्षेत्र है, 76 मध्यम-प्राथमिकता वाले जिलों में 25-50% सिंचाई है, और 128 निम्न-प्राथमिकता वाले जिलों में बेहतर सिंचाई अवसंरचना है। उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों के लिए, केंद्रीय कृषि संस्थानों से कहा गया है कि वे किसानों को सीधे उपयुक्त फसलों और बुवाई रणनीतियों पर सलाह दें।
Indian Council of Agricultural Research (ICAR) और उसके सूखा-प्रबंधन प्रभाग ने District Agriculture Contingency Plans (DACPs) तैयार की हैं, जिनमें फसल विविधीकरण, वैकल्पिक बुवाई, जल संरक्षण और कुशल सिंचाई शामिल हैं। kharif सीज़न महत्वपूर्ण है — इसने 2024-25 में भारत के खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 51% हिस्सा दिया, और मानसून देश की वार्षिक वर्षा का लगभग 70% पहुँचाता है। अभ्यर्थियों के लिए मुख्य विषय हैं — El Nino, दक्षिण-पश्चिम मानसून, kharif फसलें, millets और ICAR की आकस्मिक योजना।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 43% कम चल रही है, जिससे El Nino की चिंताएँ बढ़ी हैं
- केंद्र ने 315 संवेदनशील जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजनाएँ सक्रिय कीं
- 111 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में 25% से कम सिंचित क्षेत्र है
- किसानों को दलहन और millets जैसी कम पानी वाली फसलों की ओर निर्देशित किया गया; check dams और farm ponds तेज़ किए गए
- ICAR ने District Agriculture Contingency Plans (DACPs) तैयार कीं
- kharif फसलें 2024-25 के खाद्यान्न उत्पादन का ~51% थीं; मानसून वार्षिक वर्षा का ~70% देता है
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC (भूगोल/कृषि — मानसून, El Nino, kharif फसलें, सूखा प्रबंधन), State PCS और SSC सामान्य ज्ञान के लिए प्रासंगिक।
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