WHO ने यूरोप की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहर में 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें बताईं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहर के दौरान 21 June, 2026 से यूरोप में 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज कीं, और इस घटना को जलवायु परिवर्तन तथा वैश्विक तापन से जोड़ा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 28 June, 2026 को घोषणा की कि महाद्वीप के बड़े हिस्से को जकड़ने वाली एक भीषण गर्मी की लहर के सिलसिले में 21 June, 2026 से यूरोप भर में 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। "अतिरिक्त मौतें" (excess deaths) शब्द उन मौतों की संख्या को दर्शाता है जो किसी अवधि में सामान्य रूप से अपेक्षित संख्या से ऊपर होती हैं, और इसका व्यापक रूप से स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा अत्यधिक गर्मी जैसी घटनाओं के असली नुकसान को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
WHO ने गर्मी के तनाव को एक "मौन हत्यारा" (silent killer) बताया, और कहा कि यूरोप में घर, कार्यस्थल और स्कूल इतने अधिक तापमान के लिए नहीं बनाए गए थे। 28 June को अनुमानित 191 मिलियन लोगों के कम से कम 35 डिग्री सेल्सियस तापमान का सामना करने की आशंका थी, जिसमें गर्मी सबसे तीव्र Germany, Czech Republic, Hungary और Poland में रही। कुल मिलाकर, महाद्वीप भर में करीब 381 मिलियन लोगों के 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान का अनुभव करने का अनुमान लगाया गया।
WHO ने इन घटनाओं की बढ़ती बारंबारता को सीधे जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापन से जोड़ा, और कहा कि "पीढ़ी में एक बार" (once-in-a-generation) आने वाली गर्मी की लहरें अब लगभग हर साल आ रही हैं। एजेंसी ने कहा कि यूरोप पृथ्वी का सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जो वैश्विक औसत से करीब दोगुनी गति से गर्म हो रहा है। इसने यूरोपीय देशों से तैयारी, रोकथाम और मज़बूत स्वास्थ्य प्रणाली प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित heat health action plans बनाने का आग्रह किया।
भारत के लिए यह चेतावनी बेहद प्रासंगिक है। देश नियमित रूप से भीषण गर्मी की लहरों का सामना करता है, खासकर उत्तरी और मध्य मैदानों में, जहाँ तापमान अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है। बढ़ता वैश्विक तापमान ऐसी घटनाओं की बारंबारता और तीव्रता दोनों बढ़ा देता है, जिससे बाहरी मज़दूरों, बुज़ुर्गों और शीतलन की सुविधा से वंचित लोगों पर सबसे ज़्यादा खतरा रहता है।
भारत ने राज्य और शहर स्तर पर Heat Action Plans बनाकर, पूर्व-चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाकर और गर्मी के चरम महीनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य परामर्श जारी करके इसका जवाब दिया है। यूरोप का अनुभव इस बात को रेखांकित करता है कि अत्यधिक गर्मी को एक मामूली मौसमी असुविधा के बजाय एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में लेना और गर्म होती जलवायु के खिलाफ़ दीर्घकालिक लचीलापन बनाना कितना ज़रूरी है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- WHO ने 21 June से 28 June, 2026 के बीच यूरोप में अत्यधिक गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज कीं।
- "अतिरिक्त मौतें" (excess deaths) सामान्य रूप से अपेक्षित स्तर से ऊपर की मौतों को मापती हैं और गर्मी की लहर के असली नुकसान का एक प्रमुख संकेतक है।
- अनुमानित 191 मिलियन लोगों ने कम से कम 35 डिग्री सेल्सियस तापमान का सामना किया, जिसमें Germany, Czech Republic, Hungary और Poland सबसे ज़्यादा प्रभावित रहे।
- WHO ने गर्मी के तनाव को एक "मौन हत्यारा" बताया और कहा कि यूरोप सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जो वैश्विक औसत से करीब दोगुनी गति से गर्म हो रहा है।
- एजेंसी ने देशों से तैयारी, रोकथाम और मज़बूत स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित heat health action plans अपनाने का आग्रह किया।
- भारत भी ऐसे ही जोखिमों का सामना करता है और कमज़ोर समूहों की रक्षा के लिए Heat Action Plans, पूर्व-चेतावनी प्रणालियों और सार्वजनिक परामर्शों का उपयोग करता है।
परीक्षा प्रासंगिकता
अत्यधिक गर्मी की घटनाएँ और अतिरिक्त मौतें कई उच्च-स्कोरिंग क्षेत्रों से जुड़ती हैं: जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापन (Environment), एक संयुक्त राष्ट्र विशिष्ट एजेंसी के रूप में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भूमिका और जनादेश (International Organisations), भारत की Heat Action Plans और आपदा प्रबंधन ढाँचा, तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारी। UPSC के लिए, जलवायु-स्वास्थ्य संबंध और अनुकूलन उपाय GS Paper 3 (Environment और Disaster Management) के लिए प्रासंगिक हैं। SSC के लिए, WHO, प्रभावित देशों और अतिरिक्त मौतों की अवधारणा पर तथ्यात्मक बिंदु General Awareness खंड के लिए उपयोगी हैं।
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