सरकार ने रिस्क-आधारित व्यवस्था से Quality Control Order के अनुपालन को आसान किया
सरकार के Transition Facilitation (Quality Control) Order, 2026 में Quality Control Orders के अनुपालन को आसान बनाने के लिए एक रिस्क-आधारित व्यवस्था पेश की गई है, जो पाँच साल तक BIS की स्व-घोषणा योजना के तहत सोर्सिंग की अनुमति देती है।
सरकार ने उद्योग जगत के लिए Quality Control Orders (QCOs) का पालन आसान बनाने के लिए एक वैकल्पिक, रिस्क-आधारित अनुपालन व्यवस्था पेश की है, जबकि गुणवत्ता की गारंटी को भी बरकरार रखा गया है। इसे Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) द्वारा Transition Facilitation (Quality Control) Order, 2026 के माध्यम से अधिसूचित किया गया।
Quality Control Orders महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए जारी किए जाते हैं ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा हो, उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़े और मानकीकरण के जरिए घरेलू उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। ये आमतौर पर Bureau of Indian Standards (BIS) के मानकों का अनुपालन अनिवार्य बना देते हैं। नया आदेश एक अस्थायी, पाँच साल की व्यवस्था के रूप में काम करता है, जो निर्माताओं को पूर्ण QCO अनुपालन की ओर बढ़ने में मदद करता है। इसके तहत लाइसेंस शुरुआत में दो साल के लिए वैध होते हैं और इन्हें नवीनीकृत किया जा सकता है।
एक प्रमुख राहत सोर्सिंग में है। उद्योग अब केवल Scheme I — पारंपरिक ISI Mark योजना — के बजाय BIS (Conformity Assessment) Regulations, 2018 की Scheme II के तहत लाइसेंस रखने वाले निर्माताओं से भी आपूर्ति प्राप्त कर सकता है। Scheme I में फैक्ट्री मूल्यांकन, निगरानी और पूर्ण BIS लाइसेंस शामिल होता है, जबकि Scheme II भारतीय मानकों के अनुरूप होने की स्व-घोषणा के आधार पर आपूर्ति की अनुमति देती है।
अनुमति तकनीकी क्षमता, प्रदर्शित अनुपालन इतिहास और प्रौद्योगिकी एवं डिजाइन में प्रगति की प्रतिबद्धता के आधार पर दी जाएगी। अभ्यर्थियों के लिए यहाँ उपयोगी अवधारणाएँ हैं — QCOs, BIS की भूमिका, ISI Mark, और प्रमाणन (Scheme I) तथा स्व-घोषणा (Scheme II) के बीच का अंतर।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- DPIIT द्वारा अधिसूचित नया Transition Facilitation (Quality Control) Order, 2026
- रिस्क-आधारित व्यवस्था के जरिए Quality Control Orders (QCOs) का अनुपालन आसान
- अस्थायी 5 साल की व्यवस्था; लाइसेंस 2 साल के लिए वैध, नवीनीकरण योग्य
- केवल Scheme I (ISI Mark) के बजाय BIS Scheme II (स्व-घोषणा) के तहत सोर्सिंग की अनुमति
- उद्योग के लिए गुणवत्ता की गारंटी और सहज बदलाव के बीच संतुलन का लक्ष्य
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC और Banking परीक्षाओं (अर्थव्यवस्था — गुणवत्ता मानक, BIS, ease of doing business) तथा SSC General Awareness के लिए प्रासंगिक।
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