भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक
भारत अब चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात (crude steel) उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 9% बनाता है। मजबूत घरेलू मांग और शहरीकरण के चलते उत्पादन FY02 के 28 मिलियन टन से बढ़कर FY25 में 152 मिलियन टन हो गया।
भारत कच्चे इस्पात के उत्पादन में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है, जो केवल चीन से पीछे है। वर्ष 2000 में वैश्विक इस्पात का 1% से भी कम बनाने और नौवें स्थान पर रहने से, भारत अब 2023 तक विश्व इस्पात उत्पादन का लगभग 9% हिस्सा रखता है। अकेले चीन अब भी दुनिया का लगभग आधा इस्पात बनाता है।
यह वृद्धि तीव्र रही है। भारत का कच्चा इस्पात उत्पादन FY02 के 28 मिलियन टन से बढ़कर FY25 में 152 मिलियन टन हो गया। इसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग रही, जो 2002 और 2025 के बीच लगभग 7.6% प्रति वर्ष की दर से बढ़ी। तेजी से शहरीकरण करते देश के रूप में और बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के चलते, भारत को निर्माण, सड़कों, रेलवे और आवास के लिए भारी मात्रा में इस्पात की जरूरत है।
हालांकि भारत अपनी कुल जरूरतों के लिए पर्याप्त बुनियादी इस्पात बनाता है, फिर भी यह विशेष गुणों वाले विशेष इस्पात (speciality steel) का आयात करता है, जिसका उपयोग ऑटोमोटिव और उन्नत निर्माण क्षेत्रों में होता है, ज्यादातर Japan और South Korea से। इस व्यापार अंतर को पाटने के लिए घरेलू विशेष इस्पात उत्पादन को बढ़ाना अहम माना जाता है।
इस उद्योग का नेतृत्व बड़ी निजी विनिर्माता कंपनियां करती हैं। शीर्ष पांच कंपनियां — Tata Steel, JSW Steel, SAIL, Jindal Steel and Power, और ArcelorMittal Nippon Steel India — मिलकर घरेलू उत्पादन का 40-45% हिस्सा रखती हैं। JSW Steel का हिस्सा 2000 के 1% से बढ़कर 2024 में लगभग 11.6% हो गया, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की SAIL का हिस्सा 29% से घटकर 9% रह गया। ये पांचों कंपनियां अपनी कैप्टिव लौह अयस्क खदानों की मालिक हैं, जिससे उन्हें बड़ा लागत लाभ मिलता है क्योंकि खुले बाजार में लौह अयस्क पर 40-50% मार्क-अप लगता है।
परीक्षा की तैयारी के लिए, यह भारत की औद्योगिक ताकत और 1990 के दशक की शुरुआत में उदारीकरण के बाद कोर उद्योगों में सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र के प्रभुत्व की ओर बदलाव को दर्शाता है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक है, चीन के बाद (जो वैश्विक इस्पात का ~50% बनाता है)।
- भारत वैश्विक इस्पात उत्पादन का ~9% हिस्सा रखता है (2023); वर्ष 2000 में यह 9वें स्थान पर था।
- कच्चे इस्पात का उत्पादन 28 MT (FY02) से बढ़कर 152 MT (FY25) हो गया।
- घरेलू इस्पात मांग ~7.6% प्रति वर्ष की दर से बढ़ी (2002-2025)।
- शीर्ष 5 कंपनियां (Tata Steel, JSW, SAIL, JSPL, ArcelorMittal Nippon) उत्पादन का 40-45% हिस्सा रखती हैं।
- भारत अब भी विशेष इस्पात (speciality steel) का आयात Japan और South Korea से करता है।
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC Prelims (अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा), SSC CGL GA, Railway और State PCS परीक्षाओं के लिए प्रासंगिक (कोर उद्योग, भारत की रैंकिंग)।
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