Kalpasar परियोजना को नई गति: भारत Gulf of Khambhat पर 64 किमी लंबे बाँध की योजना बना रहा है
Kalpasar परियोजना — गुजरात में Gulf of Khambhat पर प्रस्तावित 64 किमी लंबा बाँध जो एक विशाल मीठे पानी का जलाशय बनाएगा — को भारत और नीदरलैंड्स के बीच तकनीकी सहयोग पर Letter of Intent के हस्ताक्षर से नई गति मिली है। Detailed Project Report अपने अंतिम चरण में है। परियोजना अभी अध्ययनाधीन है और पर्यावरणीय तथा तटीय अनुमतियों की प्रतीक्षा में है।
Kalpasar परियोजना — गुजरात में Gulf of Khambhat के पार एक बाँध बनाने की दीर्घकालीन प्रस्तावित अवसंरचना योजना — को भारत और नीदरलैंड्स के बीच तकनीकी सहयोग पर Letter of Intent (LOI) पर हस्ताक्षर होने के बाद नई गति मिली है। Detailed Project Report (DPR), जो परियोजना की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता की पुष्टि करेगी, National Centre for Coastal Research (NCCR), चेन्नई के पास अपने अंतिम चरण में बताई जा रही है।
Kalpasar परियोजना में Gulf of Khambhat (जिसे Gulf of Cambay भी कहते हैं) के पार 64 किलोमीटर लंबा बाँध प्रस्तावित है — यह गुजरात के पश्चिमी तट पर अरब सागर का एक संकरा प्रवेश द्वार है। बाँध खाड़ी के उत्तरी हिस्से को लगभग 2,000 वर्ग किलोमीटर के विशाल मीठे पानी के जलाशय में बदल देगा। प्रस्तावित जलाशय की सकल संग्रह क्षमता लगभग 13,000 million cubic metres (MCM) होगी — जो नर्मदा नदी पर स्थित Sardar Sarovar Dam की लगभग 9,460 MCM क्षमता से भी अधिक है। यह अवधारणा लगभग चार दशक पहले सौराष्ट्र क्षेत्र की पुरानी जल-कमी की समस्या के समाधान के लिए रखी गई थी। परियोजना का नाम Kalpasar, पौराणिक कल्पवृक्ष — मनोकामना पूर्ण करने वाले वृक्ष — से लिया गया है, जो इस प्रस्ताव के रूपांतरकारी पैमाने को दर्शाता है।
इस परियोजना का उद्देश्य Mahi, Sabarmati और Dhadhar जैसी कई प्रमुख नदियों के उस जल को उपयोग में लाना है जो अभी बिना उपयोग के समुद्र में मिल जाता है। मुख्य उद्देश्यों में शामिल हैं: सौराष्ट्र के नौ जिलों में लगभग 10 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई; बाँध संरचना पर परिवहन गलियारा बनाकर Bharuch और Bhavnagar के बीच की सड़क दूरी लगभग 240 km से घटाकर लगभग 60 km करना; और खाड़ी की ज्वारीय क्षमता का आंशिक दोहन करते हुए 2,500 MW तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पन्न करना। Gulf of Khambhat में भारत का सर्वाधिक ज्वारीय अंतर दर्ज होता है, जो इसे ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त बनाता है — हालाँकि यह घटक अभी अध्ययनाधीन है।
1988-89 की reconnaissance study में तकनीकी व्यवहार्यता का उल्लेख होने के बावजूद, परियोजना की अत्यधिक इंजीनियरिंग जटिलता के कारण इसमें दशकों तक देरी होती रही है। Gulf of Khambhat में बहुत तेज ज्वारीय धाराएँ हैं, और केंद्रीय चुनौती यह है कि जैसे-जैसे दोनों छोरों से निर्माण आगे बढ़ता है, बाँध के सबसे संकरे बिंदु पर ज्वारीय वेग तीव्रता से बढ़ता है। पर्यावरणीय चिंताएँ भी महत्वपूर्ण हैं: Sabarmati और Mahi नदियाँ काफी प्रदूषण वहन करती हैं, और जलाशय की जल गुणवत्ता जलभराव से पहले नदियों के स्तर में सुधार पर निर्भर करेगी। परियोजना के लिए पर्यावरणीय और तटीय दोनों अनुमतियाँ आवश्यक होंगी, और स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण में लगभग 15 वर्ष लगने का अनुमान है। परियोजना की अनुमानित लागत कम से कम ₹1.2 लाख करोड़ है।
परीक्षा की तैयारी के दृष्टिकोण से Kalpasar परियोजना अनेक प्रश्नपत्रों में उच्च-प्रासंगिकता वाला विषय है। यह जल संसाधन, भारत के भौतिक भूगोल (Gulf of Khambhat, ज्वारीय क्षेत्र), अवसंरचना नीति और पर्यावरणीय चिंताओं के संगम पर स्थित है। याद रखने योग्य प्रमुख तथ्य: यह एक प्रस्तावित/अध्ययनाधीन परियोजना है, पूर्ण नहीं; जलाशय समुद्री जल का मीठे पानी में रूपांतरण होगा; यह गुजरात में स्थित है; इसमें Mahi, Sabarmati और Dhadhar नदियाँ शामिल हैं; और यह Bharuch को Bhavnagar से जोड़ती है। UPSC अभ्यर्थियों को ज्वारीय ऊर्जा का पहलू और विस्थापन-रहित विशेषता भी अवश्य नोट करनी चाहिए, जो इसे पारंपरिक बाँध परियोजनाओं से अलग करती है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
['Kalpasar परियोजना में गुजरात के Gulf of Khambhat (Gulf of Cambay) पर 64 किमी लंबा बाँध प्रस्तावित है', 'लगभग 2,000 वर्ग किमी का मीठे पानी का जलाशय बनेगा जिसकी 13,000 MCM संग्रह क्षमता होगी — Sardar Sarovar Dam (9,460 MCM) से अधिक', 'Mahi, Sabarmati और Dhadhar नदियाँ जलाशय को भरेंगी; सौराष्ट्र में ~10 लाख हेक्टेयर की सिंचाई लक्षित', 'बाँध संरचना सड़क गलियारे का भी काम करेगी — Bharuch-Bhavnagar दूरी 240 km से घटकर ~60 km होगी', 'उच्च ज्वारीय-अंतर वाली खाड़ी में ज्वारीय ऊर्जा सहित 2,500 MW तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की संभावना', 'परियोजना प्रस्तावित/अध्ययनाधीन है — DPR अंतिमकरण तथा पर्यावरणीय व तटीय अनुमतियों की प्रतीक्षा; स्वीकृति मिलने के बाद अनुमानित 15 वर्ष का निर्माण काल']
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC GS-1 (नदियाँ, जल संसाधन, गुजरात का भौतिक भूगोल), GS-3 (अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरणीय अनुमतियाँ) और State PCS (गुजरात-विशिष्ट भूगोल और जल नीति) के लिए महत्वपूर्ण। SSC अभ्यर्थियों को मुख्य तथ्य याद करने चाहिए: स्थान (Gulf of Khambhat, गुजरात), संबंधित नदियाँ, Sardar Sarovar की तुलना में जलाशय का आकार, और ज्वारीय ऊर्जा का पहलू। याद रखें: यह एक प्रस्तावित परियोजना है, पूर्ण नहीं।
संबंधित लेख
Zojila Tunnel की breakthrough: Ladakh तक भारत की रणनीतिक जीवनरेखा और करीब
Zojila tunnel, जो दुनिया की सबसे लंबी उच्च ऊँचाई वाली bi-directional road tunnel है, ने …
Zojila Tunnel में सफल ब्रेकथ्रू: J&K और Ladakh को साल भर जोड़ेगी …
भारत की Zojila Tunnel — 13.14 किमी लंबी, उच्च ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी …
पूर्वोत्तर भारत को महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र के रूप में नई पहचान
जून 2026 में आधिकारिक वर्णनों ने मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों को खनिज …
दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 June 2026 को देर से केरल पहुँचा: कमज़ोर मौसम …
दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 June 2026 को केरल पहुँचा, जो IMD के अपने ही पूर्वानुमान से …
भूटान के पास 5.6 तीव्रता का भूकंप, उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर में …
7 June 2026 की रात भूटान में पुनाखा के पास 5.6 तीव्रता का एक मध्यम …