रूस ने परमाणु हथियारों को वैश्विक युद्ध के विरुद्ध एकमात्र गारंटी बताया, जबकि अंतिम हथियार-नियंत्रण संधि समाप्त
रूस ने परमाणु हथियारों को वैश्विक युद्ध के विरुद्ध एकमात्र गारंटी बताया है, और चेतावनी दी है कि दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था क्षरित हो रही है। यह बयान फरवरी में New START, अंतिम US-Russia परमाणु हथियार-नियंत्रण संधि, के समाप्त होने के बाद आया है, जिसका कोई प्रतिस्थापन तय नहीं हुआ। China को शामिल करने पर विवाद एक नए समझौते को कठिन बनाते हैं, जिससे एक नई हथियारों की होड़ की चिंता बढ़ती है।
रूस ने कहा है कि परमाणु हथियार ही एकमात्र सुरक्षा कवच हैं जो दुनिया को एक वैश्विक युद्ध में फिसलने से रोक रहे हैं, यह बयान एक नई हथियारों की होड़ की आशंकाओं के बीच आया है। यह टिप्पणी मॉस्को में एक विदेश-नीति मंच पर Kremlin के प्रवक्ता की ओर से आई, जिन्होंने तर्क दिया कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था क्षरित हो रही है और अब परमाणु प्रतिरोध ही मुख्य चीज़ है जो एक व्यापक युद्ध को रोक रही है। यहाँ तथ्यों को तटस्थ रूप से प्रस्तुत किया गया है, किसी देश के रुख का समर्थन किए बिना।
यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस और United States के बीच अंतिम परमाणु हथियार-नियंत्रण संधि, जिसे New START कहा जाता है, फरवरी में बिना किसी प्रतिस्थापन के समाप्त हो गई। हथियार-नियंत्रण संधियाँ ऐसे समझौते हैं जो प्रत्येक पक्ष द्वारा रखे जा सकने वाले परमाणु हथियारों और डिलीवरी प्रणालियों की संख्या पर सीमा लगाते हैं, और वे निरीक्षण की अनुमति देते हैं ताकि प्रत्येक पक्ष दूसरे की संख्या को सत्यापित कर सके। New START ने दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों को सीमित किया था; इसके समाप्त होने के साथ अब वे सीमाएँ लागू नहीं रहीं, भले ही दोनों पक्षों ने उच्च-स्तरीय सैन्य वार्ता फिर शुरू करने की इच्छा जताई है।
एक और जटिलता China है। United States ने ज़ोर दिया है कि किसी भी नई संधि में China को भी शामिल किया जाए, जिसका परमाणु जखीरा बढ़ रहा है पर अब भी रूस या United States की तुलना में बहुत छोटा है। बीजिंग ने सार्वजनिक रूप से इस दबाव को खारिज कर दिया है। रूस ने अपनी ओर से सुझाव दिया है कि यदि China को शामिल किया जाता है, तो United States के परमाणु-संपन्न सहयोगियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। ये मतभेद एक नए समझौते तक पहुँचना कठिन बनाते हैं।
भारत के लिए, बड़ी शक्तियों के बीच हथियार-नियंत्रण का समाप्त होना व्यापक निरस्त्रीकरण और सुरक्षा माहौल के लिए मायने रखता है। भारत एक परमाणु-हथियार संपन्न राष्ट्र है जो Nuclear Non-Proliferation Treaty का पक्षकार नहीं है, और यह विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध (credible minimum deterrence) तथा पहले प्रयोग नहीं (no first use) की घोषित नीति का पालन करता है। वैश्विक हथियार-नियंत्रण का कमज़ोर होना एक व्यापक हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे सकता है और एशिया में रणनीतिक जोखिम बढ़ा सकता है, जो सीधे भारत की सुरक्षा योजना के लिए प्रासंगिक है।
अभ्यर्थियों के लिए, यह पाठ्यक्रम के निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय-संबंध खंडों से जुड़ता है। याद रखने योग्य प्रमुख शब्द: New START (अब समाप्त हो चुकी US-Russia संधि), परमाणु प्रतिरोध, Nuclear Non-Proliferation Treaty (NPT), और भारत का विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध एवं पहले प्रयोग नहीं का सिद्धांत। प्रश्न अक्सर इन संधियों के अंतर और भारत की परमाणु मुद्रा की परीक्षा लेते हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- रूस के Kremlin प्रवक्ता ने परमाणु हथियारों को वैश्विक युद्ध के विरुद्ध एकमात्र गारंटी बताया
- New START, अंतिम US-Russia परमाणु हथियार-नियंत्रण संधि, फरवरी में बिना प्रतिस्थापन के समाप्त हुई
- हथियार-नियंत्रण संधियाँ हथियारों एवं डिलीवरी प्रणालियों पर सीमा लगाती हैं और परस्पर निरीक्षण की अनुमति देती हैं; वे सीमाएँ अब समाप्त हो गई हैं
- US चाहता है कि किसी नई संधि में China शामिल हो; China ने इसे खारिज किया, और रूस चाहता है कि US के परमाणु सहयोगी भी शामिल हों
- हथियार-नियंत्रण का कमज़ोर होना एक नई परमाणु हथियारों की होड़ की आशंका बढ़ाता है
- भारत NPT से बाहर एक परमाणु-हथियार संपन्न राष्ट्र है, जो विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध और पहले प्रयोग नहीं का पालन करता है
परीक्षा प्रासंगिकता
निरस्त्रीकरण और IR पाठ्यक्रम की परीक्षा लेता है: New START, परमाणु प्रतिरोध, NPT और भारत का पहले-प्रयोग-नहीं सिद्धांत UPSC तथा SSC के आवर्ती विषय हैं।
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