एएससीआई एफवाई26 रिपोर्ट: 97% उल्लंघनकारी विज्ञापन डिजिटल पर, चार-पाँचवाँ हिस्सा मेटा पर
भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 97% उल्लंघनकारी विज्ञापन डिजिटल मंचों पर रहे, जिनमें से 79.84% मेटा (फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप) पर थे। 9,611 कुल उल्लंघनों में सर्वाधिक 6,933 अवैध सट्टेबाजी से जुड़े।
भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने 28 मई 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार एफवाई26 के दौरान एएससीआई के संहिताओं का उल्लंघन करने वाले 97.36% विज्ञापन डिजिटल मंचों पर चले, जबकि टेलीविज़न पर 2.04% तथा प्रिंट मीडिया पर मात्र 0.26%।
डिजिटल मंचों के उल्लंघनकारी विज्ञापनों में 79.84% मेटा (फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप) पर रहे। यू-ट्यूब का स्वामी गूगल 3.59% पर और अन्य वेबसाइटें लगभग 13% पर रहीं। एएससीआई ने एफवाई26 में 11,581 विज्ञापनों की समीक्षा की — पिछले वर्ष की तुलना में 21% अधिक — जिनमें से 9,611 उल्लंघनकारी पाए गए। लगभग 98% विज्ञापनों में संशोधन आवश्यक हुआ तथा 93% मामले एएससीआई की स्वयं की निगरानी से उठाए गए।
अवैध (ऑफ़शोर) सट्टेबाजी एवं जुआ विज्ञापन 6,933 मामलों के साथ सबसे अधिक उल्लंघनकारी क्षेत्र रहा, इसके बाद रियल एस्टेट (643) तथा पर्सनल केयर (576)। समीक्षा किए गए लगभग तीन-चौथाई विज्ञापन हानिकारक उत्पादों/सेवाओं से जुड़े थे और 27% में उत्पाद की विशेषताओं, क़ीमत या जोखिम के बारे में पारदर्शिता नहीं थी।
अभ्यर्थियों के लिए यह रिपोर्ट एएससीआई की स्व-नियामक भूमिका को औपचारिक नियामक ढाँचे — उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 एवं केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए), सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम 2021, सरोगेट विज्ञापन एवं भ्रामक एंडोर्समेंट संबंधी नियमों से जोड़ती है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- संस्था: भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई), स्व-नियामक
- एफवाई26 समीक्षा किए गए विज्ञापन: 11,581 (एफवाई25 से 21% अधिक)
- कुल उल्लंघन: 9,611
- माध्यम-वार उल्लंघन: डिजिटल 97.36%, टीवी 2.04%, प्रिंट 0.26%
- डिजिटल के भीतर: मेटा 79.84%, गूगल 3.59%, अन्य वेबसाइटें ~13%
- सर्वाधिक उल्लंघनकारी क्षेत्र: अवैध सट्टेबाजी (6,933), रियल एस्टेट (643), पर्सनल केयर (576)
- स्वतःसंज्ञान निगरानी: 93%; 98% में संशोधन आवश्यक
- संबंधित ढाँचा: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, सीसीपीए, आईटी नियम 2021
परीक्षा प्रासंगिकता
यूपीएससी (शासन — उपभोक्ता संरक्षण, नियामक संस्थाएँ; अर्थव्यवस्था — विज्ञापन एवं डिजिटल मंच), एसएससी, बैंकिंग एवं राज्य पीसीएस के लिए उपयोगी।
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