गिर क्षेत्र में आठ एशियाई शेर शावकों की मृत्यु; गुजरात ने बेबीसियोसिस रोकथाम तेज़ की
गिर में पिछले एक सप्ताह में आठ एशियाई शेर शावकों की मृत्यु हुई, बेबीसियोसिस का संदेह। गुजरात ने 10 कि.मी. के दायरे में टिक-हटाओ अभियान शुरू किया है, पास के शेर अलग किए हैं और गुजरात बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान केंद्र से पुष्टि की प्रतीक्षा है।
गुजरात के गिर परिदृश्य में पिछले एक सप्ताह में आठ एशियाई शेर शावकों की मृत्यु हुई है, जिसके बाद राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में निगरानी, नियंत्रण एवं बड़े पैमाने पर टिक-हटाओ (deticking) अभियान तेज़ कर दिए हैं। वन मंत्री अर्जुन मोढ़वाडिया ने कहा कि स्थिति की निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय कर रहे हैं और 29 मई 2026 से पहले के दो दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया।
प्रारंभिक आकलन शावकों की मृत्यु को बेबीसियोसिस से जोड़ता है — टिक-जनित परजीवी बीमारी जो लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करती है। नमूने पुष्टि के लिए गुजरात बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान केंद्र भेजे गए हैं और परिणाम तीन-चार दिनों में मिलने की उम्मीद है। जाँच में सहयोग के लिए जूनागढ़ पशु-चिकित्सा महाविद्यालय के विशेषज्ञ तैनात किए गए हैं। 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले शेर अलग किए गए हैं तथा गिर एवं आस-पास के क्षेत्र में टिक-हटाओ अभियान चल रहा है।
इससे पहले 26 मई 2026 को मंत्री ने कहा था कि दो शावकों की मृत्यु बेबीसिया संक्रमण से होने का संदेह है, जबकि शेष आपसी लड़ाई या अन्य कारणों से मरे। एशियाई शेर (Panthera leo persica) केवल गुजरात में पाया जाता है। 2025 की गणना के अनुसार जनसंख्या 891 थी, जो 2020 के 674 से अधिक है, और प्रजाति अमरेली, गिर सोमनाथ एवं भावनगर ज़िलों में फैल रही है।
यह प्रकरण 2018 के उस प्रकोप की याद दिलाता है जिसमें कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस (CDV) तथा बेबीसिया संक्रमण से एक माह से भी कम समय में 24 शेरों की मृत्यु हो गई थी। उस प्रकोप के बाद राज्य ने रोग निगरानी, बफ़र-ज़ोन में मवेशियों का टीकाकरण तथा समर्पित शेर-देखभाल अस्पतालों की स्थापना तेज़ की। वर्तमान प्रतिक्रिया परखेगी कि क्या 2018 के बाद बनी व्यवस्थाएँ इस स्थानीय टिक-जनित घटना को भारत की एकमात्र एशियाई शेर आबादी के लिए और बड़ी मृत्यु-संकट में बदलने से रोक सकती हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- गिर परिदृश्य में पिछले एक सप्ताह में 8 एशियाई शेर शावकों की मृत्यु
- संदिग्ध कारण: बेबीसियोसिस (टिक-जनित परजीवी बीमारी)
- 10 कि.मी. के दायरे में टिक-हटाओ, शेर-अलगाव एवं निगरानी जारी
- नमूने पुष्टि के लिए गुजरात बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान केंद्र भेजे गए
- 2025 एशियाई शेर गणना: 891 (2020 में 674 से अधिक)
- 2018 के प्रकोप (CDV + बेबीसिया) ने एक माह में 24 शेर मारे थे
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC प्रारंभिक (पर्यावरण — एशियाई शेर, अनुसूची I प्रजाति), मुख्य (GS-III संरक्षण), राज्य PCS, SSC सामान्य जागरूकता के लिए प्रासंगिक।
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