कैबिनेट ने गुजरात के वाडिनार में नई जहाज मरम्मत सुविधा को मंजूरी दी
सीसीईए ने 5 मई 2026 को गुजरात के वाडिनार में एक नई जहाज मरम्मत सुविधा को मंजूरी दी, जिसे दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड लगभग 1,570 करोड़ रुपये के निवेश से संयुक्त रूप से विकसित करेंगे।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 5 मई 2026 को गुजरात के वाडिनार में एक नई जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित करने को मंजूरी दी। यह परियोजना दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (डीपीए) और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा संयुक्त रूप से क्रियान्वित की जाएगी।
यह सुविधा लगभग 1,570 करोड़ रुपये के निवेश से बनाई जाएगी। इसे एक ब्राउनफील्ड परियोजना के रूप में नियोजित किया गया है, यानी इसे पूरी तरह नई भूमि के बजाय मौजूदा अवसंरचना पर या उसके पास विकसित किया जाएगा।
इस सुविधा में फ्लोटिंग ड्राई डॉक, समुद्री कार्यशालाएँ और एक लंबी जेटी जैसी उन्नत मरम्मत अवसंरचना शामिल होगी। इनसे उन बड़े जहाजों की मरम्मत संभव होगी जिन्हें भारत अभी अपने कई यार्ड में संभाल नहीं पाता।
इस परियोजना से भारत की समुद्री अवसंरचना मजबूत होने, घरेलू जहाज-मरम्मत क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स एवं संबंधित उद्योगों में रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह विदेशी जहाज-मरम्मत यार्ड पर निर्भरता कम करने के भारत के लक्ष्य का भी समर्थन करती है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- सीसीईए ने 5 मई 2026 को गुजरात के वाडिनार में नई जहाज मरम्मत सुविधा मंजूर की
- दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (डीपीए) और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) की संयुक्त परियोजना
- लगभग 1,570 करोड़ रुपये का निवेश
- फ्लोटिंग ड्राई डॉक, समुद्री कार्यशालाओं और लंबी जेटी वाली ब्राउनफील्ड परियोजना
- भारत की समुद्री अवसंरचना और जहाज-मरम्मत क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य
परीक्षा प्रासंगिकता
यूपीएससी प्रीलिम्स (अर्थव्यवस्था — अवसंरचना), एसएससी सीजीएल (सामान्य ज्ञान) और बैंकिंग परीक्षाओं (करंट अफेयर्स) के लिए प्रासंगिक।
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