Polity & Governance 20 Apr 2026

CBI ने नकली नोटिस और 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों से लड़ने के लिए AI चैटबॉट 'अभय' लॉन्च किया

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 20-04-2026 को 'अभय' नामक AI-संचालित चैटबॉट लॉन्च किया, जिससे नागरिक तुरंत जाँच सकें कि एजेंसी के नाम से आया कोई नोटिस या समन असली है या नहीं। 22वें D.P. Kohli Memorial Lecture के दौरान घोषित यह लॉन्च बढ़ते 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड को निशाना बनाता है, जिसमें ठग केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी बनकर पैसे ऐंठते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ध्यान दिलाया है कि साइबर अपराधी ऐसे घोटालों से अब तक लगभग 54,000 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।

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क्या हुआ: केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 20-04-2026 को अपना पहला जनरेटिव-AI जन-सामना टूल — 'अभय' चैटबॉट — लॉन्च किया। यह टूल 22वें D.P. Kohli Memorial Lecture के तहत उद्घाटित किया गया, जो CBI के संस्थापक निदेशक की स्मृति में आयोजित होने वाला वार्षिक संबोधन है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत लॉन्च में उपस्थित रहे और उन्होंने प्रौद्योगिकी-नेतृत्व वाली पुलिसिंग पर ज़ोर दिया।

अभय कैसे काम करता है: जिसे CBI के नाम से फोन कॉल, ईमेल या लिखित समन मिलता है, वह नोटिस या दस्तावेज़ संख्या चैटबॉट में दर्ज कर सकता है। अभय इसे आधिकारिक CBI केस-मैनेजमेंट डेटाबेस से जाँचता है और बताता है कि नोटिस मौजूद है या नकली है। नकली नोटिस मिलने पर तुरंत उठाने वाले कदमों की एक छोटी सूची भी देता है, जिसमें 1930 साइबर-क्राइम हेल्पलाइन शामिल है।

यह क्यों मायने रखता है: 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड भारत का सबसे तेज़ी से बढ़ता ऑनलाइन धोखा बन गया है। आम मामले में पीड़ित को पुलिस-शैली की वर्दी में किसी का वीडियो कॉल आता है, उसे जाँच में होने का दावा किया जाता है, और घंटों लगातार वीडियो लिंक पर रखकर 'सत्यापन खातों' में पैसे भेजने का दबाव बनाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया है कि साइबर अपराधी अब तक लगभग 54,000 करोड़ रुपये ऐसे घोटालों से निकाल चुके हैं और इसे 'दूसरे नाम से डकैती' कहा है।

भारत के लिए: अभय एक बड़े प्रयास का हिस्सा है जिसमें MHA के तहत Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), 1930 हेल्पलाइन, DoT का Sanchar Saathi पोर्टल, और RBI के mule-account पर सख़्त नियम शामिल हैं। नागरिकों को नोटिस के असली / नकली होने पर तुरंत हाँ / नहीं देकर CBI सोशल-इंजीनियरिंग के उस लूप को तोड़ने का प्रयास कर रही है जिस पर ठग निर्भर हैं।

परीक्षा दृष्टिकोण: तारीख (20-04-2026), चैटबॉट का नाम (अभय), लॉन्च का अवसर (22वाँ D.P. Kohli Memorial Lecture) और CBI की मूल बातें — गठन 1963, Delhi Special Police Establishment Act, 1946 के तहत, Department of Personnel and Training (DoPT) के अधीन — याद रखें।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • 'अभय' AI चैटबॉट 20-04-2026 को 22वें D.P. Kohli Memorial Lecture में लॉन्च हुआ।
  • नागरिक नोटिस नंबर डालकर इसे आधिकारिक CBI डेटाबेस से सत्यापित कर सकते हैं।
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की उपस्थिति में उद्घाटन।
  • 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड को निशाना, जहाँ नकली CBI / ED / पुलिस वीडियो कॉल से वसूली होती है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया है कि साइबर अपराध से लगभग 54,000 करोड़ रुपये का नुकसान।
  • CBI देश की प्रमुख जाँच एजेंसी है, गठन 1963 में, DSPE Act, 1946 के तहत।

परीक्षा प्रासंगिकता

GS-II शासन / साइबर सुरक्षा और GS-III आंतरिक सुरक्षा के लिए उपयोगी। प्रीलिम्स में एजेंसी के टूल और CBI के मूल अधिनियम (DSPE Act, 1946) पर सवाल आते हैं।

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