Central Banks सोना क्यों खरीद रहे हैं और इसका US Dollar पर क्या असर है
हाल के वर्षों में पहली बार Central Banks के पास US Treasury bonds से ज़्यादा सोना है। यह explainer बताता है कि देश सोना क्यों जमा कर रहे हैं, यह 1971 में gold standard के टूटने की किस तरह याद दिलाता है, और dollar की reserve-currency हैसियत के लिए इसका क्या मतलब है।
दुनिया भर के Central Banks अपने आधिकारिक भंडार (reserves) में बड़ी मात्रा में सोना जोड़ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि देश अपनी संपत्ति को रखने के तरीके में एक बड़ा बदलाव कर रहे हैं। 2025 के अंत तक, कुल Central Bank reserves में सोने की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत हो गई, जो एक साल पहले करीब 20 प्रतिशत थी। इसी अवधि में, US सरकार के बॉन्ड (जिन्हें US Treasury securities कहा जाता है) की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से घटकर लगभग 22 प्रतिशत रह गई। इसका मतलब है कि हाल के वर्षों में पहली बार, Central Banks ने मिलकर US कर्ज़ की तुलना में सोने में ज़्यादा मूल्य रखा। यह बढ़ोतरी कुछ हद तक सोने की ऊँची कीमत को दर्शाती है, लेकिन यह सोच-समझकर की गई खरीद को भी दर्शाती है, क्योंकि देश अपने जोखिम को अलग-अलग तरह की संपत्तियों में बाँटने की कोशिश कर रहे हैं।
इस रुझान के पीछे एक मुख्य कारण भू-राजनीतिक (geopolitical) सतर्कता है। Reserves वे विदेशी संपत्तियाँ हैं जिन्हें कोई देश अपनी मुद्रा को मज़बूती देने और अंतरराष्ट्रीय भुगतान निपटाने के लिए रखता है। US Treasury bonds रखना लंबे समय से पहली पसंद रहा है, क्योंकि US dollar दुनिया की मुख्य reserve currency है, यानी वह मुद्रा जिसका इस्तेमाल ज़्यादातर देश व्यापार और बचत के लिए करते हैं। लेकिन जो देश United States के साथ तनावपूर्ण रिश्तों, बड़े US बजट घाटे (जो अमेरिका के कुल उत्पादन के करीब 6 प्रतिशत के बराबर है) और वित्तीय प्रतिबंधों (sanctions) के जोखिम को लेकर चिंतित हैं, उन्होंने सोने को तरजीह देना शुरू कर दिया है। सोना एक ऐसी संपत्ति है जिस पर किसी देश का ठप्पा नहीं होता और जिसे कोई दूसरी सरकार फ्रीज़ नहीं कर सकती। जिन देशों ने US प्रतिबंधों का सामना किया है, साथ ही जो संघर्ष वाले इलाकों के पास हैं, वे इस खरीद में सबसे आगे रहे हैं।
नवीनतम आँकड़े इस सोने की दौड़ में साफ़ अगुवाओं को दिखाते हैं। Poland ने 2025 में करीब 100 मीट्रिक टन सोना खरीदा, इसके बाद Kazakhstan, Brazil, China और Turkey रहे। 2022 से गिनें, जब Russia के Ukraine पर हमले ने व्यापक प्रतिबंधों को जन्म दिया, तब से China ने करीब 350 टन, Poland ने करीब 320 टन, Turkey ने करीब 220 टन और India ने करीब 130 टन सोना जोड़ा। दिलचस्प बात यह है कि एक बड़ा निजी खरीदार भी सामने आया: एक बड़ी stablecoin जारी करने वाली कंपनी (एक ऐसी कंपनी जो dollar के मूल्य से जुड़ी cryptocurrency चलाती है) ने 100 टन से ज़्यादा सोना खरीदा, जिससे यह संकेत मिलता है कि crypto से जुड़ी संपत्तियाँ सीमा पार लेन-देन के लिए एक और संभावित विकल्प के रूप में उभर रही हैं।
यह पहली बार नहीं है जब दुनिया का dollar पर से कुछ भरोसा कम हुआ हो। 1960 के दशक के आखिर में, Vietnam युद्ध और कल्याणकारी योजनाओं पर भारी US खर्च ने महँगाई का डर पैदा किया, और कई देशों ने Bretton Woods व्यवस्था के तहत अपने dollar को सोने से बदल लिया। यह एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें विनिमय दरें (exchange rates) dollar से तय की जाती थीं, और dollar को 35 dollar प्रति औंस की दर से सोने में बदला जा सकता था। 15 August 1971 को, US ने dollar को सोने में बदलने की सुविधा खत्म कर दी, जिससे वह व्यवस्था टूट गई। फिर भी, dollar ने दशकों तक अपनी अग्रणी भूमिका बनाए रखी, जिसमें सहयोगियों को दी गई US सुरक्षा गारंटियों और 1974 की एक व्यवस्था से मदद मिली, जिसके तहत Saudi Arabia अपनी तेल की कमाई को dollar में लगाता था। विश्लेषकों का अब कहना है कि dollar का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि US कानून के राज को बनाए रखे, सरकार के भीतर शक्ति का संतुलन कायम रखे, और सहयोगियों से किए गए वादों को निभाए।
परीक्षा की तैयारी के लिहाज़ से, यह विषय बड़ी परीक्षाओं के economy और international relations वाले हिस्सों को जोड़ता है। उम्मीदवारों को यह समझना चाहिए कि विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) क्या होते हैं, सोने को safe-haven संपत्ति क्यों माना जाता है, Bretton Woods व्यवस्था क्या थी और 1971 में यह क्यों खत्म हुई, और reserve-currency का दर्जा भरोसे तथा सुरक्षा गठबंधनों से कैसे जुड़ा है। India की अपनी लगातार सोने की खरीद (2022 से करीब 130 टन) और भुगतान के विकल्प के रूप में stablecoins का उभरना मौद्रिक नीति (monetary policy), अंतरराष्ट्रीय वित्त और करेंट अफेयर्स पर सवालों के लिए संभावित बिंदु हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- 2025 के अंत तक, वैश्विक Central Bank reserves में सोने की हिस्सेदारी करीब 27% हो गई (पहले 20% थी), जबकि US Treasury की हिस्सेदारी घटकर करीब 22% रह गई (पहले 25% थी)।
- Poland ने 2025 में करीब 100 टन सोना खरीदा, इसके बाद Kazakhstan, Brazil, China और Turkey रहे।
- 2022 से, China ने करीब 350 टन, Poland ने करीब 320, Turkey ने करीब 220 और India ने करीब 130 टन सोना जोड़ा।
- 15 August 1971 को, US ने dollar को सोने में बदलने की सुविधा खत्म कर दी, जिससे Bretton Woods की तय विनिमय-दर व्यवस्था समाप्त हो गई।
- सोने को safe-haven संपत्ति के रूप में पसंद किया जाता है क्योंकि इस पर किसी देश का ठप्पा नहीं होता और इसे प्रतिबंधों से फ्रीज़ नहीं किया जा सकता।
- US dollar दुनिया की मुख्य reserve currency बना हुआ है, जिसकी हैसियत भरोसे, कानून के राज और सुरक्षा गठबंधनों से जुड़ी है।
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC, Banking और State PCS परीक्षाओं के लिए भारतीय एवं विश्व अर्थव्यवस्था के अंतर्गत प्रासंगिक, जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार, Bretton Woods व्यवस्था, safe-haven संपत्ति के रूप में सोना और US dollar की reserve-currency हैसियत शामिल हैं।
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