केंद्र ने FY27 में कृषि मशीनरी को बढ़ावा देने और पराली जलाने पर रोक के लिए Rs 8,550 करोड़ आवंटित किए
केंद्र ने FY27 के लिए Rs 8,550 करोड़ निर्धारित किए हैं, ताकि लगभग 1.5 लाख छोटे और सीमांत किसान आधुनिक मशीनरी तक पहुँच सकें और पराली जलाना कम हो सके। यह राशि RKVY के माध्यम से SMAM योजना और इसके crop residue management घटक के तहत दी जाएगी, और 5,000 कस्टम हायरिंग सेंटर बनाने की योजना है।
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए Rs 8,550 करोड़ की वित्तीय सहायता निर्धारित की है, ताकि लगभग 1,50,000 छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों तक पहुँच मिल सके। इसका उद्देश्य कृषि के यंत्रीकरण के स्तर को बढ़ाना और कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेष (crop residue) के बेहतर प्रबंधन के ज़रिए पराली जलाने को कम करना है।
यह सहायता Sub-Mission on Agricultural Mechanisation (SMAM) के तहत दी जाएगी, जिसमें इसका Crop Residue Management (CRM) घटक भी शामिल है, और यह खर्च Rashtriya Krishi Vikas Yojana (RKVY) के माध्यम से किया जाएगा। इस योजना में 5,000 कस्टम हायरिंग सेंटर और हाई-टेक हब स्थापित करना भी शामिल है। ये ऐसी सुविधाएँ हैं जहाँ किसान महँगी मशीनों को पूरी तरह खरीदने के बजाय किफ़ायती दरों पर किराए पर ले सकते हैं। Rs 8,550 करोड़ का यह आवंटन पिछले वर्ष के Rs 7,000 करोड़ के संशोधित अनुमान से अधिक है, जो इस क्षेत्र पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है।
इस योजना के अंतर्गत आने वाले उपकरणों में happy seeders, super seeders, balers, mulchers, कृषि ड्रोन, laser land levellers, precision seed drills, paddy transplanters और combine harvesters शामिल हैं। छोटे और सीमांत किसान इसका मुख्य लक्षित समूह हैं, क्योंकि वे आमतौर पर ऐसी मशीनें अपने दम पर नहीं खरीद सकते। Agriculture Census 2015-16 के अनुसार, भारत में लगभग 14.6 करोड़ परिचालन जोत (operational holdings) हैं, जिनमें से लगभग 86 प्रतिशत छोटी और सीमांत जोतें हैं, जहाँ ज़मीन दो हेक्टेयर से कम है। सरकार ने योजना के प्रदर्शन को मापने योग्य परिणामों से जोड़ा है, जैसे मशीनरी का व्यापक अपनाया जाना और पराली जलाने की कम घटनाएँ।
परीक्षा की दृष्टि से: यह खबर परीक्षा के लिहाज़ से कई महत्वपूर्ण योजनाओं और संस्थाओं को आपस में जोड़ती है। अभ्यर्थियों को याद रखना चाहिए कि SMAM और इसका CRM घटक व्यापक RKVY के अंतर्गत आते हैं, कस्टम हायरिंग सेंटर महँगी मशीनरी के लिए साझा-अर्थव्यवस्था (shared-economy) समाधान हैं, और पराली जलाना उत्तर भारत में सर्दियों के वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। छोटी और सीमांत जोतों पर Agriculture Census का आँकड़ा भी अक्सर पूछा जाने वाला तथ्य है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- FY27 के लिए Rs 8,550 करोड़ निर्धारित, जो पिछले वर्ष के Rs 7,000 करोड़ (संशोधित अनुमान) से अधिक है
- लगभग 1,50,000 छोटे और सीमांत किसानों को लक्षित करता है
- Rashtriya Krishi Vikas Yojana (RKVY) के माध्यम से SMAM और इसके CRM घटक के तहत
- किफ़ायती किराये पर मशीनरी के लिए 5,000 कस्टम हायरिंग सेंटर और हाई-टेक हब की योजना
- उपकरणों में happy seeders, super seeders, balers, ड्रोन, laser land levellers और combine harvesters शामिल
- Agriculture Census 2015-16 के अनुसार, लगभग 86% जोतें छोटी और सीमांत (2 हेक्टेयर से कम) हैं
परीक्षा प्रासंगिकता
कृषि, सरकारी योजनाओं और अर्थव्यवस्था के अंतर्गत UPSC, SSC, State PCS और Banking परीक्षाओं के लिए प्रासंगिक।
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