चीन और उत्तर कोरिया एक-दूसरे के करीब क्यों आ रहे हैं: शी-किम मुलाकात का पूरा विश्लेषण
7 June 2026 को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने किम जोंग-उन से मिलने के लिए उत्तर कोरिया का दौरा किया, जो सात साल में प्योंगयांग की उनकी पहली यात्रा थी। यहां जानिए कि ये दोनों देश इतने करीब क्यों रहते हैं, इस रिश्ते में किस बात का तनाव है, और यह भारत के लिए क्यों मायने रखता है।
7 June 2026 को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन से मिलने के लिए दो दिन की यात्रा शुरू की। इस यात्रा ने इसलिए ध्यान खींचा क्योंकि यह अमेरिका और रूस के राष्ट्रपतियों के अलग-अलग बीजिंग दौरे के तुरंत बाद हुई, और क्योंकि यह सात साल में शी की उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग की पहली यात्रा थी। चीन जैसे बड़े औद्योगिक देश के लिए, दुनिया के सबसे गरीब और सबसे अलग-थलग देशों में से एक के साथ रिश्ते मजबूत करना केवल आर्थिक नजरिए से अजीब लग सकता है। लेकिन असली वजह व्यापार या पैसा नहीं, बल्कि भू-राजनीति (geopolitics — यानी भूगोल और ताकत किस तरह देशों के आपसी रिश्तों को आकार देते हैं) है।
इस रिश्ते की जड़ें दूसरे विश्व युद्ध के बाद के वर्षों तक जाती हैं। कोरियाई प्रायद्वीप, जिस पर 1910 से 1945 तक जापान का कब्जा रहा था, को दो हिस्सों में बांट दिया गया — एक उत्तरी हिस्सा जिसे सोवियत संघ का समर्थन था और एक दक्षिणी हिस्सा जिसे अमेरिका का समर्थन था। यह बंटवारा आगे चलकर दो अलग देशों में बदल गया। कोरियाई युद्ध (1950-1953) के दौरान चीन ने उत्तर कोरिया की मदद के लिए अपनी सेना भेजी, कुछ हद तक इस डर से कि आगे बढ़ती अमेरिका के नेतृत्व वाली सेनाएं चीन की सीमा के लिए खतरा बन सकती हैं। यह युद्ध 1953 में एक armistice (युद्धविराम समझौता, यानी पूरी शांति संधि नहीं) के साथ खत्म हुआ, और पश्चिमी दबाव के सामने डटे रहने की यह सोच तभी से चीन के नजरिए को आकार देती रही है। जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और फिलीपींस जैसे अमेरिका के साथ खड़े देश पास में होने के कारण, चीन आज भी उत्तर कोरिया को एक उपयोगी बफर (सुरक्षा-कवच) मानता है।
दशकों के दौरान चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा समर्थक बन गया है, और ऐसे समय में आर्थिक सहारा देता है जब ज्यादातर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम के चलते उस पर प्रतिबंध (sanctions — यानी आधिकारिक व्यापारिक और वित्तीय रोक) लगा रखे हैं। उत्तर कोरिया एकमात्र ऐसा देश भी है जिसके साथ चीन की आपसी रक्षा संधि है, यानी अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो दूसरे को उसकी रक्षा में मदद करनी ही होगी। साल 2026 में इस दोस्ती और आपसी सहयोग की संधि की 65वीं वर्षगांठ है, जो दिखाता है कि यह बंधन कितने लंबे समय से कायम है।
इन रिश्तों में तनाव भी है। चीन ने सार्वजनिक रूप से कोरियाई प्रायद्वीप के denuclearisation (यानी परमाणु हथियार छोड़ने) का समर्थन किया है, जिस लक्ष्य को उत्तर कोरिया पूरी तरह खारिज करता है। हाल ही में चीन ने अपने बयानों से यह शब्द हटाना शुरू कर दिया है, जिसे कुछ जानकार उसके रुख में चुपचाप संभावित नरमी के तौर पर देखते हैं। एक और उलझन रूस है: उत्तर कोरिया चीन के मुकाबले संतुलन बनाने के लिए मॉस्को पर निर्भर रहा है, और खबरों के मुताबिक उन्नत सैन्य तकनीक और कूटनीतिक समर्थन के बदले उसने यूक्रेन में रूस के युद्ध में मदद के लिए अपने सैनिक भेजे हैं। जानकार मानते हैं कि चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया तेजी से एक ढीले-ढाले गुट की तरह काम कर रहे हैं जो अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देना चाहता है, भले ही हर देश दूसरों पर बहुत ज्यादा निर्भर होने से बचता रहता है।
भारतीय प्रतियोगी परीक्षा के उम्मीदवारों के लिए यह घटना International Relations का एक बहुत काम का केस स्टडी है। यह कोरियाई बंटवारे की शीत युद्ध (Cold War) की शुरुआत, संधियों और प्रतिबंधों की भूमिका, और पूर्वी एशिया में बदलते ताकत के संतुलन से जुड़ती है। भारत इन घटनाओं पर बारीकी से नजर रखता है क्योंकि कोरियाई प्रायद्वीप में अस्थिरता एशियाई सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) और भारत की अपनी रणनीतिक स्थिति को प्रभावित करती है। UPSC और State PCS में चीन-उत्तर कोरिया आपसी रक्षा संधि, denuclearisation की बहस, और व्यापक चीन-रूस-ईरान-उत्तर कोरिया गठजोड़ पर सवालों की उम्मीद रखें, साथ ही SSC, Banking और Defence परीक्षाओं में तारीखों और संधि की वर्षगांठ पर सीधे तथ्यात्मक सवाल आ सकते हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- शी जिनपिंग ने 7 June 2026 से शुरू दो दिन के दौरे पर उत्तर कोरिया की यात्रा की, जो सात साल में प्योंगयांग की उनकी पहली यात्रा थी।
- दूसरे विश्व युद्ध के बाद कोरियाई प्रायद्वीप सोवियत-समर्थित उत्तर और अमेरिका-समर्थित दक्षिण में बंट गया; कोरियाई युद्ध (1950-1953) एक armistice के साथ खत्म हुआ, पूरी शांति संधि के साथ नहीं।
- चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक समर्थक है और एकमात्र देश है जिसके साथ उसकी आपसी रक्षा संधि है; 2026 में इस संधि की 65वीं वर्षगांठ है।
- चीन आधिकारिक रूप से कोरियाई प्रायद्वीप के denuclearisation का समर्थन करता है, लेकिन उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार छोड़ने से इनकार करता है।
- उत्तर कोरिया संतुलन बनाने के लिए रूस पर निर्भर रहता है, और खबरों के मुताबिक सैन्य तकनीक और कूटनीतिक समर्थन के बदले यूक्रेन युद्ध के लिए सैनिक भेज चुका है।
- जानकार चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया को एक ढीले-ढाले गुट के रूप में बताते हैं जो अमेरिका के वैश्विक प्रभाव को चुनौती देना चाहता है।
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC, State PCS, SSC, Banking और Defence परीक्षाओं के लिए International Relations और करेंट अफेयर्स के अंतर्गत प्रासंगिक, जिसमें चीन-उत्तर कोरिया रिश्ते, कोरियाई युद्ध की विरासत, आपसी रक्षा संधियां, denuclearisation और पूर्वी एशिया का शक्ति संतुलन शामिल हैं।
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