उच्च शिक्षा और भारतीय संघवाद: केंद्र और राज्य किस तरह सत्ता साझा करते हैं
भारत में उच्च शिक्षा का संचालन समवर्ती सूची (Concurrent List) के अंतर्गत होता है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों को कानून बनाने का अधिकार मिलता है। व्यवहार में UGC जैसे निकायों और NEP 2020 जैसी नीतियों ने केंद्र की भूमिका को मजबूत किया है, जबकि राज्य सुधारों को चुनकर अपनाते हैं। इसका परिणाम संघवाद का एक अधिक बातचीत-आधारित स्वरूप है।
भारत में केंद्र सरकार और राज्यों के बीच सत्ता किस तरह साझा होती है, यह देखने के लिए उच्च शिक्षा सबसे स्पष्ट क्षेत्रों में से एक बन गई है। नियमों, पाठ्यक्रमों, शिक्षण की भाषा, सार्वजनिक धन और डिजिटल रिकॉर्ड पर किसका नियंत्रण हो — इन सवालों ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को ऐसी जगह बना दिया है जहाँ केंद्र और राज्यों की प्राथमिकताएँ आपस में मिलती हैं, और कभी-कभी टकराती भी हैं। इसी वजह से उच्च शिक्षा चलाना अब केवल शिक्षा अधिकारियों का विषय नहीं रह गया है; अब यह भारतीय संघ के भीतर सत्ता के बुनियादी संतुलन को भी छूता है।
संविधान के अंतर्गत शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है। इसका अर्थ है कि इस पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं। फिर भी व्यवहार में केंद्र सरकार का पलड़ा अधिक भारी रहता है। शिक्षा मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और विभिन्न नियम-निर्माण एवं प्रत्यायन (accreditation) निकायों के माध्यम से केंद्र देश भर के संस्थानों पर मजबूत प्रभाव रखता है। केंद्रीय धन तक पहुँच भी अब बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए गए सुधार कार्यक्रमों का पालन करने से जुड़ती जा रही है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, उच्च शिक्षा के ढाँचे को नए सिरे से तैयार करने का एक बड़ा प्रयास है। यह चार-वर्षीय स्नातक डिग्री, अर्जित क्रेडिट को डिजिटल रूप में संग्रहीत करने के लिए Academic Bank of Credits, बहु-विषयक विश्वविद्यालय और विदेशी कैम्पस को भारत लाने के कदमों का प्रस्ताव करती है। कुछ राज्यों ने चिंता जताई है कि ये बदलाव, और UGC जैसे मौजूदा नियामकों को बदलने के प्रस्ताव, उनके अपने अधिकार को कम कर सकते हैं। कुछ राज्यों में कुलपतियों (Vice-Chancellors) की नियुक्ति किसके अधिकार में हो और राज्यपालों की भूमिका को लेकर हुए विवादों ने इस तनाव को और बढ़ाया है।
फिर भी यह रिश्ता केवल टकराव का नहीं है। अलग-अलग राजनीतिक रुझानों वाले कई राज्यों ने स्थानीय जरूरतों के आधार पर सुधारों के कुछ हिस्सों को चुनकर अपनाया है। कई राज्य तो इन नए नियमों का इस्तेमाल विदेशी विश्वविद्यालयों को आकर्षित करने और खुद को क्षेत्रीय शिक्षा केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने के लिए भी कर रहे हैं। यह संघवाद की एक अधिक बातचीत-आधारित (negotiated) शैली की ओर इशारा करता है, जहाँ केंद्र व्यापक ढाँचा तय करता है और राज्य जमीनी स्तर के कदम — जैसे भूमि स्वीकृति और बुनियादी ढाँचा — संभालते हैं।
अभ्यर्थियों के लिए यह विषय इस बात का जीवंत उदाहरण है कि समवर्ती सूची असल जीवन में किस तरह काम करती है। उच्च शिक्षा के संचालन का भविष्य केवल संवैधानिक पाठ पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि केंद्र और राज्य संघीय ढाँचे के भीतर अपनी परस्पर प्रतिस्पर्धी प्राथमिकताओं को कितनी अच्छी तरह संतुलित कर पाते हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- शिक्षा समवर्ती सूची में है, इसलिए संसद और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं
- UGC, शिक्षा मंत्रालय और प्रत्यायन निकाय केंद्र को मजबूत पकड़ देते हैं
- NEP 2020 चार-वर्षीय डिग्री, Academic Bank of Credits और विदेशी कैम्पस का प्रस्ताव करती है
- विवादों में कुलपतियों (Vice-Chancellors) की नियुक्ति और कुछ राज्यों में राज्यपालों की शक्तियाँ शामिल हैं
- केंद्रीय वित्त पोषण तेजी से राष्ट्रीय सुधार एजेंडे का पालन करने से जुड़ता जा रहा है
- कई राज्य सुधारों को चुनकर अपनाते हैं, जो संघवाद के बातचीत-आधारित स्वरूप को दर्शाता है
परीक्षा प्रासंगिकता
समवर्ती सूची (Concurrent List), केंद्र-राज्य संबंध और UGC जैसे शिक्षा नियामकों पर Polity एवं Governance के विषयों से सीधे संबंधित।
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