बॉन जलवायु वार्ता में भारत ने जलवायु वित्त और अनुकूलन पर कार्रवाई की माँग की
भारत ने जर्मनी के बॉन में UNFCCC सहायक निकायों के 64वें सत्र (SB64) में जलवायु वित्त की घटती उपलब्धता और अनुकूलन वित्त में बढ़ती खाई पर चिंता जताई है, और विकसित देशों से विकासशील देशों के प्रति अपने पेरिस समझौते के वित्तीय दायित्वों को निभाने का आह्वान किया है।
जर्मनी के बॉन में चल रही संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में भारत ने जलवायु वित्त की घटती उपलब्धता और अनुकूलन (adaptation) के लिए वित्त में बढ़ती खाई पर कड़ी चिंता जताई है। UNFCCC के सहायक निकायों के 64वें सत्र (SB64) में भारत ने पेरिस समझौते की एक प्रमुख जिम्मेदारी पर विचार के लिए समर्पित एजेंडा समय की माँग की — यह जिम्मेदारी है कि विकसित देश जलवायु कार्रवाई के लिए विकासशील देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करें।
बॉन की यह अंतर-सत्रीय (intersessional) वार्ता, जो June 8 से 18 तक चल रही है, UNFCCC के दो सहायक निकायों को एक साथ लाती है: कार्यान्वयन हेतु सहायक निकाय (SBI) और वैज्ञानिक एवं तकनीकी सलाह हेतु सहायक निकाय (SBSTA)। ये निकाय हर साल, दो लगातार Conferences of the Parties (COP) के लगभग बीच में मिलते हैं, ताकि अगले COP शिखर सम्मेलन के लिए मसौदा निर्णय और तकनीकी आधार तैयार किया जा सके। SB64, ब्राजील के बेलेम (Belém) में आयोजित COP30 के बाद की पहली ऐसी बैठक है, और इसका ध्यान COP30 के परिणामों को COP31 से पहले वार्ता पाठ में बदलने पर केंद्रित है। COP31, 2026 के अंत में तुर्की के अंताल्या (Antalya) में आयोजित होगा।
विदेश मंत्रालय के एक प्रतिनिधि द्वारा दिए गए भारत के वक्तव्य ने देश को Group of 77 और चीन (G-77), समान-विचारधारा वाले विकासशील देशों (LMDC) और BASIC समूह — ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन का समूह — की स्थितियों के साथ खड़ा किया। भारत ने तर्क दिया कि समता (equity) और ऐतिहासिक जिम्मेदारी इस कार्यान्वयन चरण के केंद्र में बनी रहनी चाहिए। इसने जोर दिया कि विकासशील देशों को गरीबी मिटाने और ऊर्जा पहुँच बढ़ाने के लिए कार्बन स्पेस की आवश्यकता है, जबकि विकसित देशों को नेतृत्व करते हुए उत्सर्जन में कटौती तेज करनी होगी, जिसमें जहाँ जरूरी हो वहाँ negative emissions हासिल करना भी शामिल है।
व्यापार और जलवायु पर भारत ने UNFCCC Convention के Article 3.5 के अंतर्गत एकपक्षीय कार्बन सीमा उपायों — जैसे यूरोपीय संघ के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) — पर चर्चा का दबाव बनाया, जो यह कहता है कि जलवायु उपायों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव से बचा जाए। भारत ने यह भी माँग की कि Mitigation Work Programme अपनी सुविधाजनक (facilitative) और गैर-निर्देशात्मक (non-prescriptive) प्रकृति बनाए रखे, और आग्रह किया कि Global Goal on Adaptation संतुलित रहे और पक्षकारों (Parties) द्वारा स्वयं संचालित हो। भारत ने Common But Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities (CBDR-RC) के सिद्धांत के आधार पर Just Transition Mechanism को क्रियाशील बनाने की माँग की।
परीक्षा की दृष्टि से, SB64 महत्वपूर्ण है क्योंकि यह COP31 की वार्ता के लिए मंच तैयार करता है। प्रमुख विषयों में जलवायु वित्त (क्या विकसित देश अपनी प्रतिबद्धताएँ पूरी कर रहे हैं), Global Goal on Adaptation (वैश्विक स्तर पर अनुकूलन प्रयासों के मार्गदर्शन हेतु ढाँचा), Global Stocktake (समग्र जलवायु प्रगति की पाँच-वर्षीय समीक्षा), और Just Transition Work Programme शामिल हैं। भारत का सुसंगत रुख — जो CBDR-RC और विकास के अधिकार पर आधारित है — UPSC, State PCS, और बैंकिंग व SSC परीक्षाओं के करेंट अफेयर्स खंडों में बार-बार आने वाला विषय है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- SB64 (UNFCCC सहायक निकायों का 64वाँ सत्र) जर्मनी के बॉन में June 8–18, 2026 तक चल रहा है।
- दो सहायक निकाय हैं SBI (कार्यान्वयन हेतु सहायक निकाय) और SBSTA (वैज्ञानिक एवं तकनीकी सलाह हेतु सहायक निकाय); ये वार्षिक COP के लिए निर्णय तैयार करते हैं।
- SB64, COP30 (बेलेम, ब्राजील) के बाद का पहला बहुपक्षीय जलवायु सम्मेलन है; COP31 तुर्की के अंताल्या में आयोजित होगा।
- भारत ने अपने वक्तव्य में G-77 व चीन, LMDC, और BASIC (ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत, चीन) के साथ खुद को खड़ा किया।
- भारत ने CBDR-RC (Common But Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि विकसित देशों को उत्सर्जन कटौती और वित्त में नेतृत्व करना चाहिए।
- भारत ने UNFCCC Convention के Article 3.5 के अंतर्गत EU के CBAM जैसे कार्बन सीमा उपायों पर चर्चा की माँग की, इन्हें विकासशील देशों पर प्रतिकूल प्रभाव बताते हुए।
- SB64 के प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में Global Goal on Adaptation, Just Transition Work Programme, Global Stocktake, और जलवायु वित्त शामिल हैं।
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC प्रीलिम्स और मेन्स (Environment, International Relations), State PCS, तथा बैंकिंग व SSC के करेंट अफेयर्स खंडों के लिए अत्यधिक प्रासंगिक। इसमें UNFCCC का ढाँचा, COP प्रक्रिया, भारत की जलवायु कूटनीति, CBDR-RC सिद्धांत, अनुकूलन वित्त, और कार्बन सीमा तंत्र शामिल हैं।
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