भारत का शहरी ऊष्मा संकट: कंक्रीट, डामर और घटते वृक्षों ने बनाए 'हीट आइलैंड'
भारतीय शहर कंक्रीट, डामर एवं AC अपशिष्ट ऊष्मा के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से 2-10 °C अधिक गर्म हो रहे हैं। अहमदाबाद का पहला हीट एक्शन प्लान (2013) एवं NDMA-नेतृत्व का राष्ट्रीय ढाँचा मॉडल हैं, परंतु भवन-संहिता एवं अनौपचारिक क्षेत्र की सुरक्षा का तेज़ी से विस्तार चाहिए।
राजस्थान के श्रीगंगानगर में इस सप्ताह तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचा — 2026 में अब तक भारत का सर्वाधिक। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आँकड़े बताते हैं कि 1961 के बाद से भारत के 'कोर हीटवेव ज़ोन' — मध्य, उत्तर-पश्चिमी एवं पूर्वी तटीय क्षेत्र, लगभग 30 प्रतिशत भू-भाग — पर लू के दौर की आवृत्ति प्रति दशक 0.1 दिन तथा अधिकतम अवधि प्रति दशक 0.55 दिन बढ़ी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने 2015-2025 को अभिलेखों के आरंभ के बाद का सबसे गर्म 11-वर्षीय खंड बताया है।
भारतीय गर्मी को अद्वितीय रूप से ख़तरनाक केवल वायुमंडल नहीं बनाता। भारतीय शहरों में 'अर्बन हीट आइलैंड' अब आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में 2 से 10 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो जाते हैं। यह अंतर कंक्रीट एवं डामर, वृक्षों के घटते आवरण तथा हज़ारों एयर कंडीशनरों से निकलने वाली अपशिष्ट ऊष्मा से बनता है। दिल्ली की औसत आर्द्रता 2015-19 एवं 2020-24 के बीच आठ प्रतिशत-बिंदु बढ़ी, जिसका बड़ा हिस्सा केवल वैश्विक तापन नहीं बल्कि बंद होती शहरी सतहों का परिणाम है।
केंद्र की प्रतिक्रिया अभी मुख्यतः 'राष्ट्रीय हीट-संबंधी बीमारी कार्ययोजना', NDMA द्वारा समन्वित शहर-स्तरीय हीट एक्शन प्लान तथा 'India Cooling Action Plan' (ICAP) 2019 के माध्यम से है। अहमदाबाद, जहाँ देश का पहला हीट एक्शन प्लान 2013 में शुरू हुआ था, ने दिखाया है कि लक्षित उपायों — पूर्व चेतावनी, ठंडे सार्वजनिक आश्रय, ASHA-स्तर का संपर्क, जल-वितरण केंद्र — से अतिरिक्त मृत्यु-दर तेज़ी से घट सकती है।
स्थायी प्रगति के लिए संरचनात्मक बदलाव आवश्यक है। भवन-निर्माण संहिताओं में ठंडी छतें, निष्क्रिय वेंटिलेशन एवं हरित आवरण अनिवार्य हों; शहरी नियोजन जल-निकायों एवं आर्द्रभूमि की रक्षा करे; परिवहन गलियारों में छायादार पैदल पथ हों; तथा श्रम कानून घोषित लू के दौरान बाहरी काम स्पष्ट रूप से सीमित करें। अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक, जो बिना आय हानि के काम नहीं रोक सकते, हीट-स्ट्रेस सुरक्षा-जाल में लाए जाएँ। ऐसे उपायों के बिना और गर्म होती गर्मियाँ राष्ट्रीय संपत्ति को टाली जा सकने वाली मौतों में बदलती रहेंगी।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- श्रीगंगानगर (राजस्थान) में 48°C — 2026 में भारत का सर्वाधिक
- लू की आवृत्ति प्रति दशक 0.1 दिन, अवधि प्रति दशक 0.55 दिन बढ़ी (IMD)
- 2015-25 अभिलेखों का सबसे गर्म 11-वर्षीय खंड (WMO)
- भारतीय शहरों में अर्बन हीट आइलैंड ग्रामीण क्षेत्रों से 2-10°C अधिक गर्म
- ढाँचे: हीट एक्शन प्लान (अहमदाबाद 2013 पहला), ICAP 2019, NDMA समन्वय
- संरचनात्मक उपाय: ठंडी छतें, हरित आवरण, अनौपचारिक श्रमिक सुरक्षा
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC मुख्य (GS-III पर्यावरण, आपदा प्रबंधन; GS-II योजनाएँ — ICAP, हीट एक्शन प्लान), SSC सामान्य जागरूकता, राज्य PCS के लिए प्रासंगिक।
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