गर्म होती रातें — भारतीय शहरों के लिए बढ़ती सार्वजनिक-स्वास्थ्य चुनौती
अध्ययन दर्शाते हैं कि भारत के कई शहरों में रात का तापमान अब दिन की गर्मी से लगभग बराबर है, जिससे बाहरी कार्य करने वालों, बच्चों एवं बुज़ुर्गों के लिए स्वास्थ्य-जोखिम बढ़ रहा है। हीट एक्शन प्लानों को मज़बूत वित्त एवं दीर्घकालिक अनुकूलन की आवश्यकता है।
बढ़ते शोध बताते हैं कि भारत के कई शहरों में रातें अब उतनी राहत नहीं देतीं जितनी पहले देती थीं। दिल्ली स्थित जलवायु अनुसंधान संगठन क्लाइमेट ट्रेंड्स के एक हालिया अध्ययन में चेन्नई की मध्यम एवं निम्न-आय आवासीय इकाइयों की निगरानी की गई और पाया गया कि घर के भीतर रात के पीक तापमान दिन के सर्वाधिक तापमान से बहुत भिन्न नहीं हैं। एयर-कंडीशनिंग की पहुँच न रखने वाले परिवारों के शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का अवसर नहीं मिल रहा।
अध्ययन एवं नैदानिक अनुभव लंबे समय तक उच्च तापमान में रहने को हृदय-तनाव तथा श्वसन एवं गुर्दा-संबंधी बीमारियों के बढ़ने से जोड़ते हैं। भारत में गर्मी-जनित बीमारियों एवं मौतों की रिपोर्टिंग अब भी कम है, क्योंकि वे केवल तब दर्ज होती हैं जब प्रत्यक्ष कारण “हीटस्ट्रोक” हो। बुज़ुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ तथा निर्माण-श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर, कृषि-श्रमिक, सफ़ाई-कर्मी एवं गिग डिलीवरी कामगार जैसे बाहरी पेशे वाले लोग विशेष रूप से असुरक्षित हैं।
कई राज्यों, शहरों एवं ज़िलों ने हीट एक्शन प्लान (एचएपी) बनाए हैं, जिनमें भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) से प्रारंभिक चेतावनी, सार्वजनिक परामर्श, कूलिंग सेंटर तथा अंतर-एजेंसी समन्वय शामिल होते हैं। परंतु इनकी गुणवत्ता असमान है — कई में निर्धारित वित्त, क्रियान्वयन तंत्र तथा शहरी हरित-आवरण, कूल-रूफ़, जल-संरक्षण एवं जैव-जलवायुयी भवन डिज़ाइन जैसी दीर्घकालिक अनुकूलन उपायों पर ध्यान नहीं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) राज्यों से एचएपी अद्यतन करने एवं हीटवेव को अधिसूचित आपदा-श्रेणी में लाने पर बल दे रहा है।
अभ्यर्थियों के लिए यह विषय जलवायु-अनुकूलन, आईएमडी एवं एनडीएमए की भूमिका, शहरी “हीट-आइलैंड” प्रभाव, व्यावसायिक स्वास्थ्य तथा यूएनएफसीसीसी के अंतर्गत अनुकूलन-वित्त की व्यापक बहस से जुड़ता है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- अध्ययन स्रोत: क्लाइमेट ट्रेंड्स, दिल्ली
- खोज: निम्न-आय वाले चेन्नई आवासों में रात के पीक तापमान दिन के पीक के निकट
- उच्च-जोखिम समूह: बुज़ुर्ग, बच्चे, गर्भवती, बाहरी कामगार, गिग कामगार
- उपकरण: राज्य/शहर/ज़िला स्तरीय हीट एक्शन प्लान (एचएपी)
- प्रमुख संस्थाएँ: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), एनडीएमए
- अनुकूलन-कमियाँ: वित्त, क्रियान्वयन, शहरी हरित-आवरण, कूल-रूफ़, जलाशय
- व्यापक संबंध: यूएनएफसीसीसी अनुकूलन-वित्त
परीक्षा प्रासंगिकता
यूपीएससी (पर्यावरण — जलवायु अनुकूलन, अर्बन हीट-आइलैंड; आपदा प्रबंधन — हीटवेव, एनडीएमए, एचएपी; सामाजिक — व्यावसायिक स्वास्थ्य), एसएससी, बैंकिंग एवं राज्य पीसीएस के लिए उपयोगी।
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