भारत के वन 2100 तक अपनी कार्बन भंडारण क्षमता लगभग दोगुनी कर सकते हैं, मॉडलिंग अध्ययन का निष्कर्ष
एक नए जलवायु-मॉडलिंग अध्ययन में पाया गया है कि वैश्विक उत्सर्जन-पथ के आधार पर भारतीय वन वनस्पति 2100 तक 35 से 97 प्रतिशत अधिक कार्बन भंडारित कर सकती है, और राजस्थान व गुजरात के शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्र सबसे अधिक प्रक्षेपित बढ़त दिखा रहे हैं।
Environmental Research: Climate पत्रिका में प्रकाशित एक मॉडलिंग अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि भारत के वन इक्कीसवीं सदी के अंत तक अपनी कार्बन भंडारण क्षमता लगभग दोगुनी कर सकते हैं। यह अनुमान वैश्विक ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन के पथ पर निर्भर है: वनस्पति कार्बन बायोमास 2100 तक निम्न-उत्सर्जन परिदृश्य में लगभग 35%, मध्यम-उत्सर्जन में 62%, और उच्च-उत्सर्जन में 97% तक बढ़ने का अनुमान है।
शोधकर्ता प्रक्षेपित वृद्धि का श्रेय भारत के कई भागों में अधिक वर्षा, उच्च वायुमंडलीय कार्बन-डाइऑक्साइड सान्द्रता जो प्रकाश-संश्लेषण में सहायक है, और पौधों में बेहतर जल-उपयोग दक्षता के संयोजन को देते हैं। ये कारक मिलकर वन वृद्धि को बढ़ावा देंगे, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो अब तक कार्बन-दुर्बल रहे हैं।
उल्लेखनीय रूप से, सबसे बड़ी सापेक्ष वृद्धि — 60% से अधिक — राजस्थान और गुजरात के शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में अनुमानित है, जहाँ वर्तमान वनस्पति आवरण और बायोमास सीमित है। इसके विपरीत, पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्व के अधिक नम क्षेत्रों में प्रतिशत-वार वृद्धि कम हो सकती है क्योंकि वे पहले से ही अपनी बायोमास सीमा के क़रीब हैं।
अध्ययन भारतीय वन सर्वेक्षण के नवीनतम अनुमानों के अनुरूप है, जिनके अनुसार कुल वन कार्बन भंडार 2013 के 6.94 अरब टन से बढ़कर 2023 में 7.29 अरब टन हो गया है। हालाँकि, लेखक चेताते हैं कि ये लाभ स्वतः-स्फूर्त नहीं हैं — ये निरंतर वन-संरक्षण, क्षरण नियंत्रण, और Paris Agreement के अंतर्गत जलवायु-शमन नीतियों के डिज़ाइन पर निर्भर करते हैं।
परीक्षा दृष्टिकोण: UPSC GS-III (पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन), प्रारंभिक-शैली तथ्यों (भारतीय वन सर्वेक्षण आँकड़े, Paris Agreement) और SSC सामान्य जागरूकता के लिए महत्त्वपूर्ण। बढ़ती CO2, प्रकाश-संश्लेषण (CO2 उर्वरीकरण प्रभाव) और बायोमास वृद्धि का संबंध एक सामान्य अवधारणात्मक MCQ है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- वनस्पति कार्बन बायोमास 2100 तक 35-97% तक बढ़ सकता है, उत्सर्जन-परिदृश्य के अनुसार
- सबसे बड़ी वृद्धि शुष्क व अर्ध-शुष्क राजस्थान व गुजरात में (60%+)
- कारण: अधिक वर्षा, CO2 उर्वरीकरण, बेहतर जल-उपयोग दक्षता
- भारतीय वन सर्वेक्षण: 2023 में कुल वन कार्बन भंडार 7.29 अरब टन (2013 में 6.94)
- अध्ययन Environmental Research: Climate में प्रकाशित
- लाभ: निरंतर वन-संरक्षण और जलवायु नीति पर निर्भर
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC GS-III पर्यावरण, जलवायु-नीति मुख्य परीक्षा प्रश्नों, और भारतीय वन सर्वेक्षण व Paris Agreement से जुड़े प्रारंभिक तथ्यों के लिए अत्यंत प्रासंगिक।
संबंधित लेख
6 जुलाई 2026 को गुजरात के गराजीया गाँव में शेरनी ने आदमी …
6 जुलाई 2026 को गुजरात के गराजीया गाँव में एक शेरनी ने मालधारी समुदाय के …
मुंबई में पेड़ गिरा: मानसून में 3 मौतें, कंक्रीट विस्तार और जड़ …
5 जुलाई, 2026 को मुंबई में भारी मानसूनी बारिश के दौरान पेड़ गिरने की घटनाओं …
सरकार भारत के संघर्षरत बाघ अभयारण्यों को पुनर्जीवित करने की योजना बना …
भारत ने अपने सबसे कमज़ोर बाघ अभयारण्यों को पुनर्जीवित करने के लिए एक नया रोडमैप …
जलवायु वित्त और समावेशी जलवायु कार्रवाई की ओर ज़ोर
Bonn Climate Conference के बाद, विकासशील देश COP31 से पहले अब भी दृढ़ जलवायु-वित्त प्रतिबद्धताओं …
कमज़ोर मानसून और बनता El Niño भारत की कृषि आपूर्ति श्रृंखला पर …
भारत में 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून देर से आया है और प्रशांत महासागर पर एक …