तपेदिक उन्मूलन की दिशा में भारत का प्रयास: प्रगति और चुनौतियां
भारत में टीबी का सबसे अधिक बोझ है — प्रतिवर्ष लगभग 28 लाख मामले और 3 लाख मौतें — और देश बेहतर निदान, उपचार, पोषण एवं प्राथमिक देखभाल के जरिए रोग उन्मूलन का लक्ष्य रखता है।
भारत में आज भी दुनिया में तपेदिक (टीबी) के सबसे अधिक मामले दर्ज होते हैं। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार लगभग 22 करोड़ भारतीयों में टीबी के जीवाणु मौजूद हैं, जिनमें से प्रतिवर्ष लगभग 28 लाख लोगों में रोग विकसित होता है और करीब 3 लाख की मृत्यु होती है। भारत ने टीबी उन्मूलन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
तपेदिक एक संक्रामक रोग है जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है और हवा के माध्यम से फैलता है। यह रोकथाम योग्य और इलाज योग्य दोनों है, लेकिन इसके लिए शीघ्र निदान, उपचार का पूरा कोर्स और अच्छा पोषण आवश्यक है। कमजोर प्रतिरक्षा या खराब पोषण वाले लोगों में जोखिम अधिक होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी को नियंत्रित करने से उसके उन्मूलन की ओर बढ़ने के लिए भारत को बेहतर निदान, छोटे उपचार कोर्स, मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, बेहतर पोषण सहायता और रोगियों पर नज़र रखने के लिए डिजिटल साधनों की आवश्यकता है। टीबी को केवल प्रबंधित करने के बजाय उन्मूलन योग्य रोग मानने के लिए एक मजबूत समग्र प्रणाली चाहिए।
अभ्यर्थियों के लिए भारत का राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम और उसका उन्मूलन लक्ष्य स्वास्थ्य एवं सरकारी योजनाओं के अंतर्गत महत्वपूर्ण विषय हैं। ये सार्वजनिक स्वास्थ्य, पोषण और प्राथमिक देखभाल के व्यापक मुद्दों से जुड़ते हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- भारत में टीबी का सबसे अधिक बोझ है
- प्रतिवर्ष लगभग 28 लाख में टीबी विकसित होती है, करीब 3 लाख की मृत्यु
- टीबी संक्रामक है, हवा से फैलती है, पर रोकथाम एवं इलाज योग्य है
- उन्मूलन के लिए बेहतर निदान, छोटे उपचार और पोषण आवश्यक
- राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम एक प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य पहल है
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC (स्वास्थ्य, सरकारी योजनाएं — टीबी उन्मूलन) तथा SSC सामान्य ज्ञान के लिए प्रासंगिक।
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