NFHS-6 की मुख्य बातें: संस्थागत जन्म 90.6%, महिलाओं का इंटरनेट उपयोग दोगुना होकर 64.3%
29 मई 2026 को जारी NFHS-6 (2023-24) के अनुसार संस्थागत प्रसव 90.6% (88.6% से ऊपर), महिलाओं का इंटरनेट उपयोग दोगुना होकर 64.3%, और जीवनशैली बीमारियों में वृद्धि। सर्वेक्षण 715 ज़िलों के 6.79 लाख परिवारों को कवर करता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 29 मई 2026 को राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) जारी किया। 2023-24 के लिए 715 ज़िलों के 6.79 लाख परिवारों को कवर करने वाला यह सर्वेक्षण शृंखला का छठा है तथा मातृ स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण एवं डिजिटल पहुँच में लगातार सुधार की पुष्टि करता है, साथ ही जीवनशैली-संबंधित बीमारियों के बढ़ने पर ताज़ी चेतावनी देता है।
संस्थागत प्रसव — लाइसेंस-प्राप्त स्वास्थ्य सुविधा में जन्म — 2023-24 में बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गए, जो NFHS-5 (2019-21) में 88.6 प्रतिशत थे। कुशल स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा कराए गए प्रसव 89.4% से बढ़कर 91.3% तथा 48 घंटे के भीतर प्रसवोत्तर देखभाल 82.8% हो गई। प्रसवपूर्व कवरेज 95.9% रहा और पहली तिमाही में प्रसवपूर्व देखभाल पाने वाली महिलाओं का अनुपात 70% से बढ़कर 76.2% हो गया। हालाँकि सरकारी सुविधाओं में जन्म का हिस्सा 61.9% से घटकर 58.6% रह गया, जो निजी स्वास्थ्य सेवा की ओर लगातार झुकाव दर्शाता है।
डिजिटल एवं वित्तीय समावेशन में सबसे तेज़ बढ़त रही। कभी इंटरनेट उपयोग कर चुकीं महिलाओं का हिस्सा 33.3% से बढ़कर 64.3% हो गया — मात्र दो वर्षों में लगभग दोगुना। बैंक या बचत खाता रखने वाली महिलाएँ 78.6% से बढ़कर 89% तथा निजी मोबाइल रखने वाली 53.9% से बढ़कर 63.6% हो गईं। 15-24 आयु वर्ग में स्वच्छ माहवारी उत्पादों का उपयोग 77.6% से बढ़कर 79.2% रहा, जिसमें माहवारी स्वच्छता योजना एवं जन-औषधि के सस्ते उत्पादों की भूमिका रही।
दूसरी ओर NFHS-6 जीवनशैली-संबंधित बीमारी संकेतकों — अधिक वज़न एवं मोटापा, उच्च रक्तचाप तथा बढ़ा रक्त-शर्करा — में दोनों लिंगों एवं ग्रामीण-शहरी भारत दोनों में लगातार वृद्धि दर्ज करता है। मातृ एवं बाल स्वास्थ्य की उपलब्धियों के साथ ये आँकड़े संकेत देते हैं कि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अब केवल मातृ-शिशु केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक गैर-संचारी रोग (NCD) एजेंडे को अपनाना होगा, और साथ ही पहले से हासिल प्रगति को सुदृढ़ रखना होगा।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- NFHS-6 (2023-24) 29 मई 2026 को जारी; 715 ज़िलों के 6.79 लाख परिवार
- संस्थागत प्रसव: 90.6% (NFHS-5 में 88.6% से ऊपर)
- कुशल जन्म-देखभाल: 91.3%; प्रसवपूर्व देखभाल: 95.9%
- सरकारी सुविधा में जन्म 61.9% से घटकर 58.6% (निजी की ओर झुकाव)
- कभी इंटरनेट उपयोग कर चुकीं महिलाएँ: 33.3% → 64.3%; बैंक खाता: 78.6% → 89%
- जीवनशैली बीमारी संकेतक (मोटापा, BP, ब्लड शुगर) ग्रामीण-शहरी दोनों में बढ़ रहे
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC प्रारंभिक (योजना एवं सर्वेक्षण — NFHS-6), मुख्य (GS-II स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण), SSC सामान्य जागरूकता, राज्य PCS के लिए प्रासंगिक।
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