NSA डोभाल-पात्रुशेव की मास्को वार्ता: आर्कटिक व्यापार गलियारा एवं ध्रुवीय समुद्री सहयोग
NSA अजीत डोभाल ने 29 मई 2026 को मास्को में रूस के निकोलाई पात्रुशेव से मिलकर आर्कटिक/उत्तरी समुद्री मार्ग व्यापार गलियारा, ध्रुवीय-जल नौसैनिक प्रशिक्षण और जहाज़ निर्माण सहयोग आगे बढ़ाया, पश्चिम एशिया द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की जहाज़रानी बाधा की पृष्ठभूमि में।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 29 मई 2026 को मास्को में रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी एवं रूस के मैरीटाइम बोर्ड के अध्यक्ष निकोलाई पात्रुशेव से मुलाक़ात की और समुद्री कनेक्टिविटी, जहाज़ निर्माण, रक्षा तथा ध्रुवीय-जल प्रशिक्षण पर सहयोग बढ़ाया। दोनों ने नवंबर 2025 में पात्रुशेव की नई दिल्ली यात्रा के दौरान चर्चित प्रस्तावों की प्रगति की समीक्षा की।
वार्ता में आर्कटिक व्यापार गलियारे — जिसे उत्तरी समुद्री मार्ग (Northern Sea Route) भी कहा जाता है — पर ख़ास ज़ोर रहा। मास्को इसे एशिया एवं यूरोप के बीच वैकल्पिक जहाज़रानी मार्ग के रूप में बढ़ावा दे रहा है। भारत के लिए यह गलियारा कम जहाज़रानी समय, आर्कटिक की ऊर्जा एवं दुर्लभ-धातु संसाधनों तक पहुँच तथा स्वेज़ नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे चोकपॉइंट से विविधीकरण का अवसर प्रस्तुत करता है। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण जब-तब बाधित होती होर्मुज की जहाज़रानी ने इसे विशेष रूप से प्रासंगिक बना दिया है।
डोभाल एवं पात्रुशेव ने ध्रुवीय जलक्षेत्रों में परिचालन के लिए भारतीय नौसैनिकों के प्रशिक्षण पर भी चर्चा की — एक विशेष क्षेत्र जिसमें रूस के पास दशकों का अनुभव है और भारत अभी क्षमता निर्माण की शुरुआत कर रहा है। भारत 2013 से आर्कटिक परिषद का पर्यवेक्षक है तथा स्वालबार्ड के न्या-एलेसुंड में हिमाद्री अनुसंधान स्टेशन संचालित करता है, परंतु आर्कटिक में वाणिज्यिक समुद्री भागीदारी अब तक सीमित रही है।
यह बैठक भारत-रूस के बीच व्यापक भागीदारी का हिस्सा है। डोभाल मास्को में पहले अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच एवं सुरक्षा मुद्दों पर उच्च-प्रतिनिधियों की 14वीं बैठक में भाग ले रहे हैं। दोनों पक्षों ने रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की पुष्टि की तथा पश्चिम एशिया एवं इंडो-पैसिफिक की उभरती स्थिति सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार साझा किए।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- NSA अजीत डोभाल ने 29 मई 2026 को मास्को में रूस के निकोलाई पात्रुशेव से मुलाक़ात की
- फोकस: आर्कटिक व्यापार गलियारा (Northern Sea Route), जहाज़ निर्माण, ध्रुवीय-जल प्रशिक्षण
- आर्कटिक मार्ग से एशिया-यूरोप जहाज़रानी कम समय एवं चोकपॉइंट विविधीकरण
- भारत 2013 से आर्कटिक परिषद का पर्यवेक्षक; स्वालबार्ड में हिमाद्री स्टेशन
- यात्रा पहले अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच, मास्को के साथ
- नवंबर 2025 की पात्रुशेव की नई दिल्ली यात्रा का अनुवर्ती
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC मुख्य (GS-II विदेश नीति — भारत-रूस, आर्कटिक), प्रारंभिक (आर्कटिक परिषद, हिमाद्री, उत्तरी समुद्री मार्ग), रक्षा परीक्षा के लिए प्रासंगिक।
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