Economy 28 May 2026

आरबीआई ने तीन सहकारी बैंकों पर नियामक उल्लंघन के लिए मौद्रिक जुर्माना लगाया

आरबीआई ने जालोर सेंट्रल सहकारी बैंक (राजस्थान), श्री लक्ष्मी सहकारी बैंक (पुणे) तथा लुनावाडा पीपल्स सहकारी बैंक (गुजरात) पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। ये केवाईसी, जमा-खाता एवं संबंधित निर्देशों के उल्लंघन के लिए हैं।

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22 मई 2026 के आदेशों के माध्यम से भारतीय रिज़र्व बैंक ने तीन सहकारी बैंकों पर अपने निर्देशों के पालन में चूक हेतु 2-2 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। ये बैंक हैं — द जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (राजस्थान), श्री लक्ष्मी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (पुणे) तथा द लुनावाडा पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (ज़िला महिसागर, गुजरात)। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई नियामक चूक पर आधारित है और किसी ग्राहक-लेन-देन की वैधता पर प्रभाव नहीं डालती।

राजस्थान के जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, जो एक ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक है, पर खातों की जोखिम-वर्गीकरण की आवधिक समीक्षा प्रणाली न रखने तथा निर्धारित अवधि में नो-योर-कस्टमर (केवाईसी) अद्यतन न करने का दोष पाया गया। इसकी सांविधिक जाँच नाबार्ड ने 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में की थी।

पुणे के श्री लक्ष्मी सहकारी बैंक पर — जोखिम-वर्गीकरण की आवधिक समीक्षा न करना, केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल केवाईसी रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआर) पर निर्धारित समय में अपलोड न करना तथा न्यूनतम बैलेंस न रखने पर निर्देशों के विरुद्ध शुल्क लगाना — पाया गया। लुनावाडा पीपल्स सहकारी बैंक पर ऐसे ऋण स्वीकृत करने का दोष लगा, जहाँ निदेशकों के रिश्तेदार गारंटर थे, जो निदेशकों, उनके रिश्तेदारों एवं संबद्ध फ़र्मों को ऋण देने पर आरबीआई के निर्देशों के विपरीत है।

अभ्यर्थियों के लिए यह कार्रवाई बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 47A तथा 46(4)(i) एवं 56 के अंतर्गत आरबीआई की शक्तियों, सहकारी बैंकों के निरीक्षण में नाबार्ड की भूमिका, केवाईसी एवं सीकेवाईसीआर के महत्व, तथा सहकारी बैंकों के शासन-संबंधी मुद्दों को दर्शाती है।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • आदेश तिथि: 22 मई 2026; जुर्माना: 2-2 लाख रुपये
  • बैंक: जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव (राजस्थान); श्री लक्ष्मी को-ऑपरेटिव (पुणे); लुनावाडा पीपल्स (गुजरात)
  • उल्लंघन: केवाईसी समीक्षा/अद्यतन, सीकेवाईसीआर अपलोड, न्यूनतम बैलेंस शुल्क, निदेशक-रिश्तेदारों को ऋण
  • क़ानूनी आधार: बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 47A(1)(c), 46(4)(i), 56
  • ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक का निरीक्षक: नाबार्ड

परीक्षा प्रासंगिकता

यूपीएससी (अर्थव्यवस्था — बैंकिंग विनियमन, सहकारी बैंक, केवाईसी; राज्यव्यवस्था — नियामक संस्थाएँ), बैंकिंग परीक्षाएँ, एसएससी एवं राज्य पीसीएस के लिए उपयोगी।

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