गिरते रुपये को संभालने के लिए RBI दर वृद्धि सहित विकल्पों पर विचार
रुपया लगभग 97 प्रति डॉलर पर आने के बाद RBI दर वृद्धि, करेंसी स्वैप और विदेशी डॉलर जुटाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।
रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 97 के नए निचले स्तर पर पहुँचने के बाद Reserve Bank of India इसे स्थिर करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें नीतिगत ब्याज दर में वृद्धि, अधिक डॉलर-रुपया स्वैप, और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाना शामिल है।
रुपये पर दबाव मजबूत डॉलर, भारतीय बाज़ारों से विदेशी निवेशकों की निकासी, और पश्चिम एशिया तनाव से जुड़ी ऊँची कच्चे तेल की कीमतों के कारण है। कमज़ोर रुपया आयात — विशेषकर तेल — को महँगा करता है और महँगाई बढ़ा सकता है।
RBI गवर्नर ने संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक अत्यधिक सट्टेबाज़ी रोकने के लिए कार्रवाई करेगा। दर वृद्धि रुपये को सहारा देगी पर अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत भी बढ़ाएगी।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- रुपया लगभग 97 प्रति US डॉलर पर गिरा
- विकल्प: दर वृद्धि, डॉलर-रुपया स्वैप, विदेशी डॉलर जुटाना
- दबाव: मजबूत डॉलर, FPI निकासी, ऊँचा कच्चा तेल
- RBI गवर्नर: अनुचित सट्टेबाज़ी रोकेंगे
- कमज़ोर रुपया = महँगा आयात व महँगाई जोखिम
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC प्रारंभिक (अर्थव्यवस्था — विनिमय दर, RBI), बैंकिंग व SSC के लिए प्रासंगिक।
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