Polity & Governance 17 May 2026

सुप्रीम कोर्ट के स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की गई

17 मई 2026 को जारी अध्यादेश के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है। न्यायालय में लगभग 93,966 लंबित मामलों का हवाला दिया गया। कोलेजियम ने नई रिक्तियों के लिए पाँच नामों की सिफारिश भी कर दी है।

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17 मई 2026 को राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश जारी कर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या मुख्य न्यायाधीश सहित 34 से बढ़ाकर 38 कर दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इससे कुछ ही दिन पहले सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को मंज़ूरी दी थी, परन्तु संसद सत्र में न होने के कारण अनुच्छेद 123 के अंतर्गत अध्यादेश का सहारा लिया गया।

सरकार के अनुसार चार और न्यायाधीश जोड़ने से शीर्ष न्यायालय “त्वरित न्याय” सुनिश्चित कर सकेगा। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के अनुसार अध्यादेश की तिथि को सुप्रीम कोर्ट में करीब 93,966 मामले लंबित थे। 27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय कोलेजियम ने नई रिक्तियों के लिए चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों एवं वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना के नामों की सिफारिश की।

सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृत संख्या को संसद ने पूर्व में कई बार बढ़ाया है — 1950 में 8 से क्रमशः 11, 14, 18, 26, 31 और हाल ही में 2019 में 34 तक, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन के माध्यम से। अनुच्छेद 124(1) संसद को विधि द्वारा यह संख्या निर्धारित करने का अधिकार देता है। आलोचकों का कहना है कि लंबित मामलों का असली कारण न्यायाधीशों की संख्या से अधिक प्रक्रियात्मक विलंब, अनुच्छेद 136 के अंतर्गत दायर विशेष अनुमति याचिकाओं की संख्या तथा न्यायालय का व्यापक क्षेत्राधिकार है।

अभ्यर्थियों के लिए यह उच्च न्यायपालिका की संरचना, अध्यादेश-निर्माण शक्ति, कोलेजियम प्रणाली और न्यायिक लंबन जैसे विषयों के नवीनतम तथ्यों का स्रोत है।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • अध्यादेश की तिथि: 17 मई 2026; उसी माह केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंज़ूरी दी थी
  • नई स्वीकृत संख्या: 38 न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश सहित), पहले 34
  • अध्यादेश का संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 123
  • सुप्रीम कोर्ट की संख्या तय करने का आधार: अनुच्छेद 124(1)
  • अध्यादेश की तिथि को लंबित मामले: लगभग 93,966 (एनजेडीजी)
  • ऐतिहासिक वृद्धि: 8 (1950) → 11 → 14 → 18 → 26 → 31 → 34 (2019) → 38 (2026)
  • 27 मई 2026 की कोलेजियम सिफारिश: 4 उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश + वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना

परीक्षा प्रासंगिकता

यूपीएससी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा (राज्यव्यवस्था — सर्वोच्च न्यायालय की संरचना, अध्यादेश-निर्माण शक्ति, कोलेजियम), एसएससी एवं बैंकिंग सामान्य जागरूकता तथा राज्य पीसीएस न्यायपालिका अनुभाग के लिए प्रासंगिक।

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