सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षा (एसआईआर) को सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षा (एसआईआर) को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया है। सूची से हटाए गए संदिग्ध गैर-नागरिकों के मामले अब नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत अगले चुनाव से पहले निपटाए जाएंगे।
27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षा (एसआईआर) को संवैधानिक रूप से वैध बताते हुए इसे “स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की दिशा में एक प्रगति” कहा। यह निर्णय एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में आया, जब एसआईआर बिहार में पूर्ण हो चुकी थी तथा अन्य 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में द्वितीय चरण में लागू की जा चुकी थी।
एसआईआर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के अंतर्गत किया जाने वाला घर-घर पुनरीक्षण अभ्यास है। पूर्ण चरणों में लगभग 6.5 करोड़ नाम हटाए गए, जिससे मतदाता सूची में 10 प्रतिशत से अधिक की शुद्ध कमी दर्ज हुई। कई राज्यों में लिंगानुपात भी घटा, जिसे याचिकाकर्ताओं ने मनमानी कटौती का प्रमाण बताया।
न्यायालय ने एसआईआर को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल मतदाता-पात्रता तक सीमित है और सूची से नाम हटाने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है। साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया कि जिन व्यक्तियों के नाम संदिग्ध गैर-नागरिकता के आधार पर हटाए गए हैं, उनके मामले निर्वाचन आयोग चार सप्ताह के भीतर नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी को भेजे और अगले आम/विधानसभा/स्थानीय निकाय चुनाव से पहले नागरिकता निर्धारण पूरा किया जाए। आलोचकों के अनुसार यह नागरिकता सिद्ध करने का भार हटाए गए व्यक्ति पर डालने के बराबर है।
अभ्यर्थियों के लिए यह निर्णय कई विषयों को जोड़ता है — अनुच्छेद 324–326, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 एवं 1951, निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का पृथक्करण, तथा नागरिकता अधिनियम, 1955 एवं विदेशी अधिकरण की प्रक्रिया।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- निर्णय की तिथि: 27 मई 2026
- मामला: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम भारत निर्वाचन आयोग
- एसआईआर बिहार में पूर्ण; द्वितीय चरण 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में
- मतदाता सूची में 10% से अधिक शुद्ध कटौती; लगभग 6.5 करोड़ नाम हटाए गए
- नाम हटना = नागरिकता समाप्ति नहीं
- निर्वाचन आयोग को 4 सप्ताह में सक्षम प्राधिकारी (नागरिकता अधिनियम, 1955) को मामले भेजने हैं
- नागरिकता निर्णय अगले चुनाव से पहले पूरा किया जाएगा
परीक्षा प्रासंगिकता
यूपीएससी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा (राज्यव्यवस्था — निर्वाचन आयोग, अनुच्छेद 324–326, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 एवं 1951, नागरिकता अधिनियम), एसएससी एवं बैंकिंग सामान्य जागरूकता तथा राज्य पीसीएस के लिए प्रासंगिक।
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