एसआरएस 2024 रिपोर्ट: भारत का शिशु मृत्यु-दर 24, जन्म-दर 18.3 प्रति 1,000
भारत के महापंजीयक कार्यालय की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2024 रिपोर्ट के अनुसार शिशु मृत्यु-दर 24 प्रति 1,000 जीवित जन्म तथा कच्ची जन्म-दर 18.3 प्रति 1,000 आबादी पर है। राज्यों और ग्रामीण-शहरी के बीच बड़े अंतर बने हुए हैं।
भारत के महापंजीयक कार्यालय ने सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2024 रिपोर्ट जारी की है। यह आँकड़े भारत के निरंतर जनसांख्यिकीय परिवर्तन को रेखांकित करते हैं — कच्ची जन्म-दर 2024 में 18.3 प्रति 1,000 आबादी रही, जो 2014 की 21 की तुलना में कम है। शिशु मृत्यु-दर (आईएमआर) 2024 में 24 प्रति 1,000 जीवित जन्म पर आ गई, जबकि 2014–19 की अवधि में यह 39 थी।
राष्ट्रीय औसत राज्य-वार एवं ग्रामीण-शहरी विषमताएँ छिपा देते हैं। छत्तीसगढ़ की आईएमआर 36 के साथ सर्वाधिक है, इसके बाद मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश 35-35 पर हैं। दूसरी ओर केरल मात्र 8 तथा तमिलनाडु, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश 11 पर हैं। भारत की ग्रामीण आईएमआर 27 है जबकि शहरी 17, जो स्वास्थ्य-सेवा, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण एवं माता-पोषण की असमान पहुँच को दर्शाता है।
इन सुधारों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत निरंतर निवेश, टीकाकरण की बढ़ी कवरेज तथा संस्थागत प्रसव की बढ़ती हिस्सेदारी का बड़ा योगदान है। प्रजनन-दर में गिरावट दर्शाती है कि भारत के कई राज्य प्रजनन-प्रतिस्थापन-स्तर (टीएफआर 2.1) से नीचे जा चुके हैं। यह बुजुर्ग आबादी, जनसांख्यिकीय लाभांश की अवधि तथा अंतर-राज्यीय प्रवास पर दीर्घकालिक नीति-प्रश्न उठाता है।
अभ्यर्थियों के लिए एसआरएस जनगणना, एनएफएचएस तथा एचएमआईएस के साथ-साथ जनसांख्यिकीय सूचकांकों का प्रमुख स्रोत है। यह जननी सुरक्षा योजना, पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष तथा सतत विकास लक्ष्य-3 (अच्छा स्वास्थ्य) से जुड़ता है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- स्रोत: एसआरएस 2024, भारत के महापंजीयक कार्यालय
- कच्ची जन्म-दर 2024: 18.3 प्रति 1,000 (2014 में 21)
- शिशु मृत्यु-दर 2024: 24 प्रति 1,000 जीवित जन्म (2014–19 में 39)
- सर्वाधिक आईएमआर वाले राज्य: छत्तीसगढ़ (36), मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश (35-35)
- न्यूनतम आईएमआर वाले: केरल (8); तमिलनाडु, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश (11)
- ग्रामीण आईएमआर: 27; शहरी: 17
- प्रजनन-प्रतिस्थापन-स्तर टीएफआर: 2.1
- संबंधित: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जननी सुरक्षा योजना, पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, एसडीजी-3
परीक्षा प्रासंगिकता
यूपीएससी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा (सामाजिक मुद्दे — स्वास्थ्य सूचकांक, एसआरएस, एनएफएचएस, एसडीजी; शासन — एनएचएम, पोषण), एसएससी, बैंकिंग एवं राज्य पीसीएस के लिए उपयोगी।
संबंधित लेख
यूएन वर्ल्ड सिटीज़ रिपोर्ट 2026: वैश्विक आवास संकट; भारत में किफ़ायत-अंतर तीव्र
यूएन-हैबिटैट की वर्ल्ड सिटीज़ रिपोर्ट 2026 — “वैश्विक आवास संकट: कार्य-मार्ग” — के अनुसार 3.4 …
NEET-UG सुधार बहस: कंप्यूटर-आधारित परीक्षा, NTA में बदलाव और विकेंद्रीकरण की माँग …
पेपर लीक के आरोपों पर 2026 की NEET-UG रद्द होने के बाद भारत की चिकित्सा …
नमूना पंजीकरण प्रणाली रिपोर्ट 2024: भारत की प्रजनन दर 1.9 पर, शिशु …
नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट, 2024 दर्शाती है कि भारत की कुल प्रजनन दर …
तपेदिक उन्मूलन की दिशा में भारत का प्रयास: प्रगति और चुनौतियां
भारत में टीबी का सबसे अधिक बोझ है — प्रतिवर्ष लगभग 28 लाख मामले और …
आंध्र प्रदेश ने बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए नकद और …
आंध्र प्रदेश सरकार ने बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करने हेतु तीसरे बच्चे के लिए 30,000 …