अध्ययन: एयर कंडीशनरों की दक्षता दोगुनी करने से भारत को 2.5 लाख करोड़ रुपये तक की बचत और बिजली कटौती से बचाव
एक नए अध्ययन में पाया गया कि अगले दशक में AC की ऊर्जा दक्षता दोगुनी करने से भारत बिजली की कमी से बच सकता है और उपभोक्ताओं को 2.5 लाख करोड़ रुपये तक की बचत करा सकता है। AC पहले से ही चरम बिजली माँग का लगभग 25% हैं। दक्षता BEE स्टार प्रणाली और ISEER से मापी जाती है।
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि अगले दशक में एयर कंडीशनरों (AC) की ऊर्जा दक्षता दोगुनी करके भारत बिजली की कमी से बच सकता है और उपभोक्ताओं को 2.5 लाख करोड़ रुपये (लगभग 25 अरब डॉलर) तक की बचत करा सकता है। "बीटिंग द हीट: हाउ एयर कंडीशनर एफिशिएंसी स्टैंडर्ड्स हेल्प इंडिया एवर्ट पावर शॉर्टेजेज़ एंड कट कंज्यूमर बिल्स" शीर्षक वाला यह अध्ययन भारत की ऊर्जा और जलवायु पर केंद्रित एक विश्वविद्यालय अनुसंधान केंद्र ने तैयार किया है।
अध्ययन के अनुसार भारत हर साल लगभग 1 से 1.5 करोड़ नए AC जोड़ता है, और अगले दशक में 13 से 15 करोड़ और जुड़ने की उम्मीद है। AC अब चरम बिजली माँग का सबसे बड़ा कारक बनते जा रहे हैं। ये पहले से ही 60 से 70 गीगावाट (GW) यानी लगभग चौथाई चरम माँग में योगदान करते हैं, और एक AC एक एलईडी बल्ब से 100 से 150 गुना अधिक बिजली खर्च करता है। नीतिगत कदमों के बिना अकेले AC 2030 तक चरम माँग को 120 GW और 2035 तक 180 GW तक पहुँचा सकते हैं। भारत ने हाल ही में भीषण लू के दौरान 270 GW चरम माँग पार की।
भारत में AC की ऊर्जा दक्षता को स्टार-लेबलिंग प्रणाली और भारतीय मौसमी ऊर्जा दक्षता अनुपात (ISEER) के जरिए मापा जाता है, जिसे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) संचालित करता है। अध्ययन के अनुसार 2028 में प्रस्तावित मानक उन्नयन न्यूनतम दक्षता सीमा को 25 प्रतिशत (एक स्टार) बढ़ाएगा। यह सुझाव देता है कि एक दीर्घकालिक रोडमैप तब तक मानक बढ़ाता रहे जब तक आज का सबसे दक्ष AC (वर्तमान 5-स्टार या ISEER 6.7 से बेहतर) 2033 तक न्यूनतम मानक न बन जाए।
अध्ययन के अनुसार ऐसा रोडमैप 2030 तक लगभग 10 GW और 2035 तक 47 GW चरम माँग घटा सकता है — जो लगभग 100 बड़े बिजली संयंत्रों के बराबर है — और बिजली ढाँचे में अनुमानित 8 लाख करोड़ रुपये बचा सकता है। थोड़ी अधिक शुरुआती कीमत के बावजूद, दक्ष AC कम बिलों के जरिए दो-तीन साल में अपनी लागत वसूल कर सकते हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- AC पहले से ही भारत की चरम बिजली माँग का 60-70 GW (लगभग 25%) हैं; एक AC एक एलईडी बल्ब से 100-150 गुना बिजली खर्च करता है।
- कदम न उठाने पर AC 2030 तक चरम माँग को 120 GW और 2035 तक 180 GW तक ले जा सकते हैं।
- भारत में AC दक्षता को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) की स्टार प्रणाली और ISEER से मापा जाता है।
- 2028 का मानक उन्नयन न्यूनतम दक्षता सीमा को 25% (एक स्टार) बढ़ाएगा।
- दक्षता दोगुनी करने से 2.5 लाख करोड़ रुपये तक की बचत और 2035 तक लगभग 47 GW चरम माँग में कमी हो सकती है।
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC, SSC और राज्य PCS (पर्यावरण एवं अर्थव्यवस्था) के लिए उपयोगी: ऊर्जा दक्षता, BEE, स्टार रेटिंग और चरम बिजली माँग सामान्य समसामयिकी विषय हैं।
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