सुप्रीम कोर्ट ने 2007 RPL फ़्यूचर्स मामले में RIL के विरुद्ध सेबी के 'धोखाधड़ी' निष्कर्ष रद्द किए
सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के RPL फ़्यूचर्स ट्रेडिंग मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के विरुद्ध सेबी के 'धोखाधड़ी' निष्कर्ष रद्द किए तथा ₹447 करोड़ की डिसगॉर्जमेंट आदेश को निरस्त किया, यह कहते हुए कि SAT ने PFUTP नियमों के तहत 'गंभीर त्रुटि' की।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (RPL) के नवंबर 2007 के फ़्यूचर्स ट्रेडिंग मामले में सेबी द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) के विरुद्ध दिए गए धोखाधड़ी के निष्कर्ष रद्द कर दिए। अदालत ने सेबी के उस निर्देश को भी रद्द किया जिसमें RIL से कथित अनुचित लाभ के रूप में ₹447 करोड़ डिसगॉर्ज (वसूली) करने को कहा गया था।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने 'गंभीर त्रुटि' की जब उसने यह माना कि RIL द्वारा अन्य 12 इकाइयों के साथ किए गए एजेंसी-शैली के समझौते सेबी (Prohibition of Fraudulent and Unfair Trade Practices) नियमों — जिन्हें PFUTP नियम कहा जाता है — के तहत धोखाधड़ी एवं हेरफेर बनते हैं। अदालत ने कहा कि नियामक ने केवल यह दिखाया कि RIL ने समझौतों का उपयोग अधिक पोज़िशन लिमिट लेने के लिए किया, परंतु यह सिद्ध नहीं किया कि समझौतों के उपयोग का तरीक़ा वास्तव में धोखाधड़ीपूर्ण था।
डिसगॉर्जमेंट राशि पर पीठ ने कहा कि सेबी ने RIL के बाज़ार में हिस्से एवं कथित अनुचित लाभ की गणना के लिए ग़लत पद्धति अपनाई। यह फ़ैसला PFUTP नियमों के तहत नियामक से अपेक्षित ऊँचे साक्ष्य-मानक को रेखांकित करता है और स्पष्ट करता है कि केवल पोज़िशन लिमिट पार करना — अतिरिक्त धोखाधड़ी की अभिप्राय (intent) के प्रमाण के बिना — बाज़ार हेरफेर नहीं बनता।
इस फ़ैसले के भारत की व्यापक प्रतिभूति-कानून व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव हैं। यह PFUTP नियमों को पोज़िशन-लिमिट उल्लंघनों के विरुद्ध सामान्य उपकरण के रूप में उपयोग करने की सेबी की क्षमता को सीमित करता है तथा समान तथ्यों पर हुए समझौतों की समीक्षा के लिए बाज़ार सहभागियों को प्रोत्साहित कर सकता है। सेबी से अपेक्षा है कि वह फ़ैसले का विस्तृत अध्ययन करे और भविष्य के PFUTP मामलों में साक्ष्य संग्रह मज़बूत करने के लिए प्रक्रियात्मक या नियामक संशोधनों पर विचार करे।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- SC ने नवंबर 2007 RPL फ़्यूचर्स मामले में RIL के विरुद्ध सेबी फ़्रॉड निष्कर्ष रद्द किए
- ₹447 करोड़ डिसगॉर्जमेंट आदेश भी रद्द
- पीठ: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला नेतृत्व में
- SAT ने PFUTP नियमों के तहत 'गंभीर त्रुटि' की
- केवल पोज़िशन लिमिट पार करना, धोखे के अभिप्राय बिना, धोखाधड़ी नहीं
- सेबी के PFUTP मामलों के लिए ऊँचा साक्ष्य-मानक दोहराया गया
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC मुख्य (GS-II नियामक निकाय, GS-III प्रतिभूति बाज़ार), बैंकिंग/आरबीआई ग्रेड B, न्यायिक सेवा के लिए प्रासंगिक।
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