सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी बरकरार रखा, पूर्वव्यापी कर मांग की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी बरकरार रखा और 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूर्वव्यापी कर मांगों की अनुमति दी, यह मानते हुए कि संशोधनों ने केवल मौजूदा कानून को स्पष्ट किया।
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग पर 28% वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। एक बड़े फैसले में न्यायालय ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर लगाई गई 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूर्वव्यापी कर मांगों के विरुद्ध चुनौतियों को भी खारिज कर दिया।
यह फैसला न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सुनाया। इसने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों, कैसीनो, टर्फ क्लबों और उद्योग संगठनों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया।
कंपनियों ने तर्क दिया था कि 28% जीएसटी केवल 1 अक्टूबर 2023 से लागू होना चाहिए, उससे पहले की अवधि के लिए नहीं। सरकार ने तर्क दिया कि संशोधनों ने केवल मौजूदा कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया और कोई नया कर नहीं बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार का पक्ष स्वीकार किया।
यह फैसला इस क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव डालेगा। यह एक संवैधानिक बिंदु को भी छूता है, क्योंकि यह ऑनलाइन गेमिंग को 'सट्टेबाजी और जुआ' मानता है, जो राज्य सूची का विषय है।
परीक्षार्थियों के लिए यह मामला कई महत्वपूर्ण विषयों को जोड़ता है: जीएसटी ढांचा और जीएसटी परिषद की भूमिका, केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन, तथा 'स्पष्ट किए गए' कर और नए लगाए गए कर के बीच अंतर।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी बरकरार रखा
- 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूर्वव्यापी कर मांग की अनुमति
- पीठ: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन
- सरकार का पक्ष स्वीकार: संशोधनों ने स्पष्ट किया, नया कर नहीं बनाया
- ऑनलाइन गेमिंग को सट्टेबाजी व जुआ माना गया (राज्य सूची का विषय)
परीक्षा प्रासंगिकता
यूपीएससी प्रीलिम्स (राजव्यवस्था — न्यायपालिका एवं केंद्र-राज्य संबंध; अर्थव्यवस्था — जीएसटी), बैंकिंग परीक्षा और एसएससी सीजीएल (सामान्य ज्ञान) के लिए प्रासंगिक।
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