सिक्किम बना भारत का पहला पेपरलेस न्यायपालिका राज्य
सिक्किम भारत का पहला पेपरलेस न्यायपालिका राज्य बन गया है, जिसकी घोषणा भारत के मुख्य न्यायाधीश ने गंगटोक में की। इसकी अदालतें अब ई-फाइलिंग और डिजिटल केस प्रबंधन पर चलती हैं, जो विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
सिक्किम भारत का पहला पेपरलेस (कागज़-रहित) न्यायपालिका राज्य बन गया है। इसकी औपचारिक घोषणा भारत के मुख्य न्यायाधीश ने गंगटोक में आयोजित एक न्यायिक सम्मेलन में की। इस कदम के साथ राज्य की अदालतों में अब दस्तावेज़ों को भौतिक रूप से जमा करने की आवश्यकता नहीं रही।
राज्य की न्यायपालिका अब ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म, केंद्रीकृत डिजिटल केस प्रबंधन प्रणाली, और अदालती कार्यवाही व साक्ष्यों के इलेक्ट्रॉनिक भंडारण के माध्यम से कार्य करती है। इस व्यवस्था में जाने के लिए कई वर्षों में सर्वर स्थापित किए गए और पुराने केस रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया गया।
यह पहल विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के तहत तकनीक-आधारित शासन के व्यापक लक्ष्य का समर्थन करती है। सिक्किम 1975 में भारत का 22वाँ राज्य बना और इसका शासन संविधान के अनुच्छेद 371F के विशेष प्रावधानों के तहत होता है।
परीक्षार्थियों के लिए दो तथ्य महत्वपूर्ण हैं: सिक्किम का पहला पेपरलेस न्यायपालिका राज्य होना, और अनुच्छेद 371F के तहत इसका विशेष संवैधानिक दर्जा।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- सिक्किम = भारत का पहला पेपरलेस न्यायपालिका राज्य
- घोषणा: भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा गंगटोक में
- ई-फाइलिंग और केंद्रीकृत डिजिटल केस प्रबंधन का उपयोग
- विकसित भारत 2047 दृष्टिकोण का समर्थन
- सिक्किम 1975 में भारत का 22वाँ राज्य बना
- अनुच्छेद 371F के विशेष प्रावधानों के तहत शासित
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC प्रीलिम्स व मेन्स (राजव्यवस्था — न्यायपालिका, अनुच्छेद 371F), SSC और राज्य PCS परीक्षाओं (सामान्य ज्ञान) के लिए उपयोगी।
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